लखनऊ, 23 अप्रैल 2026:
लखनऊ स्थित यूपी पुलिस फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (UPSIFS) में आयोजित क्वांटम कम्प्यूटिंग कार्यशाला में नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) के चेयरमैन एवं एचसीएल के सह संस्थापक डॉ. अजय चौधरी ने भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से एकध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। हर देश अपनी तकनीक के बल पर खड़ा है। ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी तकनीक पर नियंत्रण बेहद जरूरी हो गया है।
डॉ. चौधरी ने अमेरिका के सॉफ्टवेयर और चीन के हार्डवेयर प्रभुत्व का उदाहरण देते हुए चेताया कि भारत को अपने डिजिटल ढांचे को पूरी तरह स्वदेशी बनाना होगा। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि आने वाले समय में युद्ध पारंपरिक नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और चिप्स के जरिए लड़े जाएंगे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए स्वदेशी तकनीक की सफलता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में यूपी के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने शुरुआती सफलताएं हासिल की हैं। अगले 2-3 वर्षों में 1000 क्यूबिट क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। यूपी में आईआईटी कानपुर के सहयोग से क्वांटम कंप्यूटर लाने की दिशा में काम चल रहा है। नोएडा-एनसीआर को डीप टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि डीप टेक स्टार्टअप्स को 30 से 40 करोड़ रुपये तक की फंडिंग दी जाएगी। इसके साथ ही डेटा सेंटर नीति में नई प्रोत्साहन योजना लाई जा रही है। राज्य सरकार ने एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये और उभरती तकनीकों के शोध के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के सदस्य प्रो. अजय सिंह ने बताया कि क्वांटम तकनीक का असर अब फार्मा, बैंकिंग और फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों में दिखने लगा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के जरिए अरबों दस्तावेज सुरक्षित किए जा रहे हैं, जबकि फार्मा कंपनियां दवा खोजने की प्रक्रिया को 10-15 साल से घटाकर 3-4 साल में ला रही हैं।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा को क्वांटम आधारित बनाने, क्रिप्टो-एजाइल सिस्टम अपनाने और डेटा सुरक्षा कानूनों के पालन पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति है और बिना कानूनी अनुपालन के कोई भी तकनीक भरोसेमंद नहीं हो सकती। कार्यशाला में देशभर के शिक्षण संस्थानों के छात्रों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डीप टेक, इनोवेशन और क्वांटम भविष्य पर व्यापक चर्चा हुई।






