Lucknow City

500 लेखा परीक्षकों को योगी ने दिए नियुक्ति पत्र, बोले- अब सिफारिश नहीं, योग्यता तय करती है नौकरी

लखनऊ के लोकभवन में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पेपर लीक से ‘जीरो टॉलरेंस’ तक का किया उल्लेख, बिना बैंक से कर्ज लिए पूरी की गई गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना

लखनऊ, 4 मई 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 371 और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए 129 लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान योगी ने आर्थिक मोर्चे पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और पूर्व की सरकारों पर निशाना साधा।

सीएम ने 2017 से पहले की व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उस समय मेडिकल-इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं से लेकर विभिन्न आयोगों और पुलिस भर्ती तक में पेपर लीक आम बात थी। उन्होंने कहा कि चाचा-भतीजा संस्कृति हावी थी, सिफारिशों की सूचियां आती थीं और 50 पदों पर 75 भर्तियां कर दी जाती थीं। इससे विवाद और कोर्ट केस होते थे। सबसे ज्यादा नुकसान युवाओं को उठाना पड़ता था।

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योगी ने दावा किया कि वर्तमान सरकार में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गोरखपुर का एक सिख युवक और लखनऊ की एक मुस्लिम युवती चयनित हुई हैं। यह बिना भेदभाव के योग्यता आधारित चयन का प्रमाण है। उन्होंने दोहराया कि सरकार की नीति अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।

सीएम ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित किया। सहकारी एवं पंचायत लेखा परीक्षा में चयनित 371 अभ्यर्थियों में 78 महिलाएं और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा में 129 में से 25 बेटियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती के कारण अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं और लगातार नियुक्ति पत्र वितरण जारी है।

आर्थिक मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर में करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, जबकि ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, बीसी सखी और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी योजनाएं युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

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योगी ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में सरकार बनने पर खजाना खाली था और कोई बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं था लेकिन वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन के बल पर आज यूपी ‘रेवेन्यू सरप्लस स्टेट’ बन चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 600 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर बिना बैंक ऋण के किया गया है। पूरी परियोजना पर 42,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका है।

पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि जेपीएनआईसी परियोजना की लागत 200 करोड़ से बढ़कर 860 करोड़ रुपये पहुंच गई, फिर भी वह अधूरी है। यह वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण है। वहीं एक्साइज से होने वाली आय 12 हजार करोड़ से बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है जो लीकेज पर लगाम का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम तक मजबूत वित्तीय ढांचा विकसित करना जरूरी है। उन्होंने नवचयनित अभ्यर्थियों को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि इंटरनल ऑडिट व्यवस्था प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी। इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत आदि उपस्थित थे।

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