लखनऊ, 20 मई 2026:
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में आरक्षण और पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के मुद्दे को केंद्र में लाने की रणनीति तेज कर दी है। बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने समाजवादी पीडीए ऑडिट रिपोर्ट जारी करते हुए भाजपा सरकार पर आरक्षण में बड़ी लूट का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि वर्ष 2019 से अब तक प्रदेश की 22 सरकारी भर्तियों में पीडीए वर्ग के 11,514 आरक्षित पदों के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण के संवैधानिक नियमों को तोड़ा गया और पिछड़े व दलित वर्गों के अधिकार छीने गए। सपा प्रमुख ने विशेष रूप से चर्चित 69000 शिक्षक भर्ती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसमें ओबीसी वर्ग के 23.14 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के 4.8 प्रतिशत आरक्षण के अधिकार का हनन हुआ।
सपा अध्यक्ष ने घोषणा की कि यदि 2027 में उनकी सरकार बनती है तो सत्ता में आने के 90 दिनों के भीतर जातीय जनगणना कराई जाएगी और 69000 शिक्षक भर्ती विवाद का समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण दान नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतंत्र की सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम है।
भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए अखिलेश ने कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़े तो यह सरकार की पक्षपातपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है, क्योंकि यह लोगों के अधिकार छीन लेता है।
अखिलेश यादव ने भाजपा की बुलडोजर राजनीति पर भी तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार बुलडोजर चलाना ही चाहती है तो उसे समाज में फैली असमानता को खत्म करने और सभी वर्गों को उनका उचित आरक्षण दिलाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
सपा प्रमुख ने ‘लेटरल एंट्री’ नियुक्तियों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस व्यवस्था के जरिए पिछले दरवाजे से अपने पसंदीदा लोगों को नौकरियों में समायोजित कर रही है ताकि आरक्षण व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर हो जाए। अखिलेश ने कहा कि भाजपा समाज के वंचित वर्गों को समान अवसर नहीं देना चाहती और आरक्षण के मुद्दे पर बेईमानी कर रही है।






