
लखनऊ, 26 जुलाई 2026:
यूपी में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को खत्म करने के लिए सरकार ने कैच-अप शिक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों और डायट संस्थानों में 31 जुलाई तक कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं तथा रीडिंग कैंपेन से जुड़ी आईईसी सामग्री प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित की जाएगी। उद्देश्य यह है कि शिक्षक रोज इन शैक्षणिक संदेशों का उपयोग करते हुए परिणाम आधारित और दक्षता आधारित शिक्षण को बढ़ावा दें।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), डायट प्राचार्यों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों, एसआरजी तथा एआरपी को समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों से कहा गया है कि आईईसी सामग्री का मुद्रण कराकर उसे विद्यालयों और संबंधित कार्यालयों में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
योगी सरकार का मानना है कि पूरे प्रदेश में एक समान शैक्षणिक संदेश और स्पष्ट अधिगम लक्ष्य उपलब्ध होने से शिक्षकों को पढ़ाने की बेहतर दिशा मिलेगी। बच्चों के सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसी सोच के तहत कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, कक्षा शिक्षण की प्रभावी प्रथाओं और रीडिंग अभियान को एकीकृत रूप से लागू किया जा रहा है।
अभियान को सफल बनाने के लिए 15 सूत्रीय रणनीति तैयार की गई है। इसमें अधिगम स्तर से पीछे रह गए बच्चों की पहचान, आधारभूत दक्षताओं का आकलन, स्तरानुसार समूह बनाकर शिक्षण, दैनिक एवं साप्ताहिक शिक्षण योजना, गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम का प्रभावी उपयोग, नियमित अभ्यास, सतत मूल्यांकन, रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा, अभिभावकों की सहभागिता तथा बच्चों की प्रगति की निरंतर निगरानी जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है। लक्ष्य हर बच्चे को उसकी कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर तक पहुंचाना है।
विद्यालयों में लगाए जाने वाले ‘निपुण लक्ष्य’ पोस्टरों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और अंग्रेजी के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य दर्शाए जाएंगे। इससे शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के सामने हर कक्षा की अपेक्षित दक्षताएं स्पष्ट रहेंगी। इसके साथ ही आईईसी सामग्री में कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं को भी शामिल किया गया है।
इनमें बच्चों की सक्रिय सहभागिता, गतिविधि आधारित शिक्षण, खुले प्रश्नों का प्रयोग, पठन-लेखन अभ्यास, टीएलएम का प्रभावी उपयोग, सतत मूल्यांकन, नियमित प्रतिपुष्टि और सहयोगात्मक अधिगम पर विशेष जोर दिया गया है। रीडिंग कैंपेन के तहत रीडिंग कॉर्नर, पुस्तक चर्चा, कहानी वाचन और अन्य नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित कर भाषा दक्षता और सीखने की क्षमता को नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।






