लखनऊ, 9 मई 2026:
यूपी में बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में योगी सरकार तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ स्थित गोमती बैराज को अत्याधुनिक और आदर्श बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इस परियोजना से राजधानी की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई तकनीक का सहारा मिलेगा।
प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से लखनऊ की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर का निर्धारित जल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध होता है। बारिश के दौरान गोमती नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक और रासायनिक क्षरण बढ़ गया था। इससे गेटों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगी थी। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने चरणबद्ध तरीके से सभी गेट बदलने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए। 2025 में चार अन्य गेट प्रतिस्थापित किए गए। अब अंतिम चरण में शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है।
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि नए गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। हर गेट दो स्तरों में तैयार किया गया है। ऊपरी हिस्से का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सभी 10 गेटों की चौड़ाई 18 मीटर और ऊंचाई 4.95 मीटर निर्धारित की गई है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार ये गेट लंबे समय तक बेहतर काम करेंगे।
उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित न होने देना था। इसके लिए बैराज के ऊपरी हिस्से में कॉफरडैम बनाया गया है जिससे मरम्मत कार्य के दौरान जल स्तर नियंत्रित रखा जा सके। 15 जून तक 45 दिनों की बंदी निर्धारित की गई है। विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहा है जिससे कार्य समय से पहले पूरा किया जा सके।
इसके साथ ही बैराज को विशेष तकनीक से स्वचालित बनाने की तैयारी भी चल रही है। इससे गेटों का संचालन डिजिटल माध्यम से होगा। जल स्तर की निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी तथा पूरी प्रणाली सुरक्षित, पारदर्शी और हाईटेक हो जाएगी।






