लखनऊ, 9 मई 2026:
एक मां के लिए उसकी बेटी की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं होता। बेटी जब तक घर न लौटे, मां का मन चिंता और आशंकाओं से घिरा रहता है लेकिन यूपी में वर्ष 2017 के बाद बदले माहौल ने माताओं की इस चिंता को काफी हद तक कम किया है। योगी सरकार में महिला सुरक्षा को लेकर हुए सख्त कदमों और पुलिस की सक्रियता ने प्रदेश की तस्वीर बदलने का दावा मजबूत किया है। अब माताएं कह रही हैं कि देर रात तक भी बेटियों के बाहर रहने पर पहले जैसा डर महसूस नहीं होता।
लखनऊ की रजनी त्रिपाठी बताती हैं कि उनकी 15 वर्षीय बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है और कई बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण देर से घर लौटती है। उनका कहना है कि पहले जहां शाम सात बजे के बाद घर से बाहर निकलना भी मुश्किल लगता था, वहीं अब पुलिस की सख्ती और लगातार गश्त से माहौल बदला है। अब मनचलों में डर दिखाई देता है। जरूरत पड़ने पर मैं अपनी बेटी को रात 10 बजे भी अकेले भेजने में नहीं झिझकती।

त्रिवेणीनगर निवासी कंचन दीक्षित का कहना है कि 2017 से पहले सड़कों पर असुरक्षा का माहौल महसूस होता था लेकिन अब अपराधियों में कार्रवाई का भय है। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने जो डर देखा वैसा माहौल अब बेटियों को नहीं झेलना पड़ रहा।

ममता निगम भी अपनी 17 वर्षीय बेटी की सुरक्षा को लेकर पहले की तुलना में अधिक निश्चिंत हैं। उनकी बेटी शाम को कोचिंग जाती है। ममता कहती हैं कि पहले देर होने पर लगातार चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब पुलिस की मौजूदगी और नियमित गश्त भरोसा देती है।

अयोध्या की ज्योतिमा सिंह ने भी कानून-व्यवस्था में बदलाव को महसूस किया। उन्होंने कहा कि पहले कोशिश रहती थी कि बेटी शाम होने से पहले घर लौट आए लेकिन अब जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस सहायता उपलब्ध हो जाती है।

लखनऊ की ललिता प्रदीप मानती हैं कि महिला सुरक्षा केवल पुलिसिंग से नहीं बल्कि सामाजिक सोच से भी जुड़ी है। उनके अनुसार योगी सरकार ने अपराधियों पर सख्ती के साथ-साथ समाज में बेटियों के सम्मान की भावना को भी मजबूत किया है।

प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड, सड़कों पर बढ़ी पुलिस मौजूदगी, महिला सुरक्षा अभियानों और त्वरित कार्रवाई ने महिलाओं में सुरक्षा का भाव मजबूत किया है। यही वजह है कि अब यूपी की बेटियां शिक्षा, करियर और अपने सपनों की ओर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास और बेखौफ होकर कदम बढ़ा रही हैं।






