लखनऊ, 10 मई 2026:
यूपी में सुशासन और जवाबदेही की व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। प्रदेश सरकार की एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) अब शिकायतों के निस्तारण के माध्यम के साथ ही जिलों की प्रशासनिक कार्यशैली और विकास कार्यों की गुणवत्ता का बड़ा पैमाना बन चुकी है। अप्रैल माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर बेहतर प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण पेश किया है।
आईजीआरएस की ताजा रैंकिंग में रामपुर ने 140 में से 138 अंक हासिल किए हैं। इसका प्रतिशत 98.57 रहा। लगातार चार माह से पहले स्थान पर बने रहने वाले रामपुर ने यह साबित किया है कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण शिकायत निस्तारण से जनता का भरोसा मजबूत होता है। डीएम अजय द्विवेदी के मुताबिक शासन की मंशा के अनुरूप जिले में विकास कार्यों को तय समयसीमा में पूरा कराया जा रहा है। साथ ही आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है।
रिपोर्ट में पीलीभीत ने 137 अंक हासिल कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। जिले का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। यह लगातार चौथे महीने दूसरे स्थान पर कायम है। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के अनुसार जनसुनवाई को प्राथमिकता देकर शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।इसका सकारात्मक असर रैंकिंग में दिखाई दे रहा है।
वहीं श्रावस्ती और अमेठी ने 136-136 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया। श्रावस्ती की डीएम अन्नपूर्णा गर्ग ने बताया कि विकास परियोजनाओं और जन शिकायतों की नियमित समीक्षा के लिए हर सप्ताह अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही मामलों को निस्तारित माना जाता है।
आईजीआरएस के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की समीक्षा की जाती है। राजस्व कार्यों, विकास योजनाओं और जन शिकायतों के निस्तारण को विभिन्न मानकों पर परखा जाता है। इसके आधार पर जिलों की रैंकिंग जारी होती है।
अप्रैल माह की टॉप-10 सूची में हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया ने भी अपनी जगह बनाई है। यह रैंकिंग इस बात का संकेत मानी जा रही है कि प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और जनसेवा की संस्कृति तेजी से मजबूत हो रही है।





