लखनऊ/संभल, 5 मई 2026:
यूपी में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगी सरकार ने अब संभल को बड़ा तीर्थ केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा के बाद संभल को नए धार्मिक हब के रूप में विकसित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में 24 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन वंश गोपाल तीर्थ के विकास के लिए 4.50 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसमें से 3.37 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप संभल की पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि बेनीपुर चक स्थित वंश गोपाल तीर्थ से ही 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत होती है और यहीं इसका समापन भी होता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।

परियोजना के तहत तीर्थ स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। सामने भव्य स्वागत द्वार के निर्माण पर 31.67 लाख और पीछे की ओर 15.60 लाख रुपये खर्च होंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मल्टीपरपज हॉल (भूतल व प्रथम तल) पर 95.67 लाख, यात्री शेड पर 25 लाख, शौचालय परिसर पर करीब 26 लाख और चेंजिंग रूम पर 7.42 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा स्थल विकास में पत्थर के चबूतरे, कोटा स्टोन फ्लोरिंग और स्टेनलेस स्टील रेलिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।
वंश गोपाल तीर्थ को लेकर प्रचलित मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध द्वापर युग से जुड़ा है। कहा जाता है कि करीब 5000 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने देवी रुक्मिणी के साथ यहां विश्राम किया था और भविष्य में संभल में भगवान कल्कि के अवतार का संकेत दिया था। बाद में ब्रह्मा द्वारा यहां गोपालेश्वर महादेव की स्थापना किए जाने की भी मान्यता है, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया।
सरकार की योजना केवल एक तीर्थ के विकास तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे संभल को एक सशक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की है। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के अनुसार 24 कोसी परिक्रमा और कल्कि तीर्थ क्षेत्र को जोड़ते हुए 68 तीर्थ स्थलों, 19 महाकूपों और 5 प्रमुख तीर्थों का संरक्षण और पुनरुद्धार किया जाएगा।
इसके साथ ही महिष्मती नदी सहित प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मंदिरों-कुंडों के जीर्णोद्धार और स्थानीय कारीगरों व गाइड्स को जोड़कर रोजगार सृजन पर भी जोर दिया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी योजना और आधुनिक सुविधाओं के जरिए संभल को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान देने की तैयारी है।






