लखनऊ, 13 मई 2026:
यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य के साथ योगी सरकार अब तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार की रणनीति साफ है कि प्रदेश के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संकीस्थानों से निकलने वाले छात्र केवल डिग्रीधारी ही न बनें। वे आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक अनुभव और इंडस्ट्री स्किल्स के साथ सीधे रोजगार और उद्यम से जुड़ें। इसी दिशा में तकनीकी शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और नवाचारों की उच्चस्तरीय समीक्षा की गई।
प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, डेटा सेंटर, ईवी सेक्टर और एमएसएमई इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार तकनीकी संस्थानों को उद्योगों के अनुरूप तैयार करने में जुटी है। समीक्षा बैठक में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने में तकनीकी संस्थानों की भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को रोजगारपरक और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में प्लेसमेंट पोर्टल, एआई इंटीग्रेशन, नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग, इंडस्ट्री पार्टनरशिप और विभिन्न एमओयू की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में तकनीकी संस्थानों में इंडस्ट्रियल विजिट और ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री आशीष पटेल ने स्पष्ट कहा कि इंजीनियरिंग छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
सरकार अब सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों को एक्सप्रेसवे, टनल और डैम निर्माण स्थलों का भ्रमण कराएगी। इसके साथ मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को ईवी निर्माण इकाइयों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर छात्र के लिए कम से कम दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
बैठक में बताया गया कि विभाग के प्लेसमेंट पोर्टल पर अब तक 8 हजार से अधिक छात्र ऑनबोर्ड हो चुके हैं। वहीं नौकरी डाट कॉम के सहयोग से यूपी के विद्यार्थियों के लिए विशेष लैंडिंग पेज तैयार किया जा रहा है। इससे युवाओं को स्थानीय और वैश्विक स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिल
सकेंगे।
योगी सरकार तकनीकी शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यू एज टेक्नोलॉजी को भी तेजी से शामिल कर रही है। इंफोसिस समेत विभिन्न संस्थानों के सहयोग से एआई आधारित नए पांठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश के युवा भविष्य की इंडस्ट्री जरूरतों के अनुरूप दक्ष बन सकेंगे। सरकार का मानना है कि कौशल, तकनीक और उद्योग आधारित शिक्षा ही उत्तर प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी और प्रदेश को देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में शामिल करेगी।






