लखनऊ, 13 मई 2026:
यूपी में सरकारी शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। प्रदेश में संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय अब केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं रह गए हैं अपितु आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों के संगम के रूप में उभर रहे हैं। योगी सरकार ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराकर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने में जुटी है।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इन विद्यालयों में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। विज्ञान और गणित जैसे कठिन विषयों को प्रोजेक्टर और ऑडियो-वीडियो सामग्री के जरिए आसान और रोचक बनाया जा रहा है।
इसका सकारात्मक असर छात्रों की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास पर भी दिखाई दे रहा है। विद्यालयों में भारतीय संस्कृति और अनुशासन को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सुबह की प्रार्थना सभा में योग और ध्यान का नियमित अभ्यास कराया जाता है। इससे विद्यार्थियों में मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और अनुशासन की भावना विकसित हो रही है।
इसके साथ ही नैतिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संदेश भी दिया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के मुताबिक जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इससे वे किसी भी स्तर पर निजी विद्यालयों के छात्रों से पीछे न रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप बच्चों के सर्वांगीण विकास पर लगातार कार्य किया जा रहा है।
प्रदेश में वर्तमान समय में 103 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं। इसके साथ मथुरा, गोंडा, बलिया और कानपुर देहात सहित विभिन्न जिलों में 20 नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 93 विद्यालय संचालित थे। अब योगी सरकार शिक्षा के विस्तार और सुविधाओं के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देकर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुटी हुई है।






