लखनऊ, 15 मई 2026:
उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लिए योगी सरकार ने एक व्यापक विकास मॉडल तैयार किया है। अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति पर आधारित यह रोडमैप प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ढांचे, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देगा।
सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश आने वाले दो दशकों में न केवल देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बने, बल्कि समावेशी विकास का ऐसा मॉडल पेश करे जिसमें किसान, युवा, महिलाएं, गांव और उद्योग सभी बराबर के भागीदार हों।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ी है। वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 16.83 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मौजूदा समय में राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 356 अरब डॉलर के स्तर पर आंकी जा रही है और यह देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
करीब 24 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल मानव संसाधन है। राज्य की कुल आबादी में 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 62.80 प्रतिशत है। सरकार का मानना है कि यही युवा शक्ति आने वाले वर्षों में प्रदेश की आर्थिक तरक्की की सबसे बड़ी आधारशिला बनेगी।
अर्थ शक्ति के तहत कृषि, एमएसएमई, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को विकास का मुख्य इंजन बनाया गया है। सरकार कृषि में नई तकनीक, वैल्यू एडिशन और एग्री-बिजनेस को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश पहले से ही खाद्यान्न, गन्ना और दुग्ध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
एमएसएमई क्षेत्र को औद्योगिक विकास की रीढ़ मानते हुए छोटे और मध्यम उद्योगों को पूंजी, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई गई है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना और निवेश मित्र पोर्टल के जरिए लाखों युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया है। डिजिटल प्रदेश की अवधारणा के तहत ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और आईटी सेक्टर के विस्तार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी आर्थिक विकास से जोड़ा गया है। अयोध्या,वाराणसी मथुरा और प्रयागराज जैसे शहर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहे हैं। सृजन शक्ति के तहत आधारभूत ढांचे और जीवन गुणवत्ता को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश को निवेश और उद्योग का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं।
पूर्वांचल, गंगा और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इस बदलाव की बड़ी मिसाल हैं। नोएडा के साथ लाल बहादुर शास्त्री और कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट प्रदेश की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई मजबूती दे रहे हैं।
जीवन शक्ति के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सुशासन को प्राथमिकता दी गई है। कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है, जबकि बेहतर कानून व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन के जरिए निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया गया है।
सरकार का कहना है कि विकसित उत्तर प्रदेश का सपना केवल सरकारी योजनाओं से पूरा नहीं होगा। इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही अहम होगी। इसी सोच के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है, ताकि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश के विकास का सबसे मजबूत इंजन बन सके।






