गोरखपुर, 15 मई 2026:
पत्नी से लंबे समय से चल रहे विवाद और मुकदमों से परेशान एक इंजीनियर ने गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जान देने से पहले उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया। वीडियो में वह पेड़ पर बंधे फंदे को दिखाते हुए कहते हैं कि मेरा सेहरा तैयार हो गया है।
मृतक की पहचान कुशीनगर के नगर पंचायत क्षेत्र स्थित स्वामी विवेकानंद नगर, बेलवा पलकधारी निवासी 33 वर्षीय प्रद्युम्न कुमार यादव के रूप में हुई है। वह मध्य प्रदेश के इंदौर में एक निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम करते थे। करीब 1 मिनट 48 सेकेंड के वीडियो में प्रद्युम्न ने कहा कि वह जिंदगी की जंग हार चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके जाने का वक्त अभी नहीं था, लेकिन पत्नी के अत्याचारों ने जीने की इच्छा खत्म कर दी। उन्होंने अपने बड़े भाई से माता-पिता का सहारा बने रहने की अपील भी की।

वीडियो में उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि उनके इस कदम से माता-पिता को गहरा दुख होगा, लेकिन अपनी पीड़ा के आगे वह कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा कि अब उनका बुलावा आ गया है। बताया गया कि प्रद्युम्न की शादी 2 जून 2017 को तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र की निवासी अर्पिता से हुई थी। दोनों की पांच साल की एक बेटी है। परिवार के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया था और पिछले छह वर्षों से मामला अदालत में चल रहा था।
परिजनों का कहना है कि पत्नी ने दहेज उत्पीड़न और भरण-पोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। 12 मई को पडरौना कोर्ट में भरण-पोषण मामले की सुनवाई थी। इसी सिलसिले में प्रद्युम्न 10 मई को इंदौर से अपने घर आए थे। अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को तय थी। परिवार के मुताबिक, अदालत से लौटने के बाद वह हाटा स्थित अपने जीजा के घर गए। वहां से उन्हें गोरखपुर होकर ट्रेन से वापस इंदौर जाना था। रास्ते में कुसम्ही जंगल पड़ता है, इसलिए उन्होंने बुढ़िया माई मंदिर में दर्शन करने का फैसला किया।
मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने पास के एक पेड़ पर गमछे से फंदा बनाया। इसके बाद वीडियो रिकॉर्ड किया, उसे व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया और फांसी लगा ली। आसपास के लोगों की नजर पड़ी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मोबाइल फोन और पहचान पत्र के आधार पर उनकी पहचान की और परिजनों को खबर दी। परिवार का कहना है कि लगातार मुकदमों की वजह से प्रद्युम्न मानसिक दबाव में थे। बार-बार छुट्टी लेकर अदालत आना पड़ता था, जिससे नौकरी पर भी असर पड़ रहा था।






