लखनऊ, 18 मई 2026:
यूपी में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर योगी सरकार ने बड़ा और राजनीतिक रूप से बेहद अहम फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस फैसले को पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी समीकरण साधने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।
कैबिनेट बैठक में 12 प्रस्ताव रखे गए और सभी को मंजूरी दे दी गई। बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा। आयोग यह भी जांच करेगा कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी कितनी है और उन्हें किस अनुपात में आरक्षण दिया जाना चाहिए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि जनसंख्या से जुड़े अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो आयोग सर्वेक्षण के माध्यम से नए आंकड़े जुटाएगा। इसके आधार पर निकायवार आनुपातिक आरक्षण तय किया जाएगा।
प्रदेश सरकार का यह फैसला उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर वैज्ञानिक और कानूनी आधार तैयार करेगा ताकि भविष्य में आरक्षण व्यवस्था पर किसी प्रकार का विवाद न खड़ा हो।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। आयोग का अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाया जाएगा। इसके अलावा ऐसे विशेषज्ञों को सदस्य बनाया जाएगा जिन्हें पिछड़ा वर्ग मामलों की गहरी जानकारी और अनुभव हो।
सरकार ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ और पंचायत राज अधिनियमों के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का प्रावधान पहले से मौजूद है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण का अंतिम खाका तैयार किया जाएगा।






