लखनऊ, 20 मई 2026:
यूपी में महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियान का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत औरैया जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बहनों का बाल विवाह समय रहते रुकवा दिया। प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई ने दो बेटियों का भविष्य सुरक्षित करने के साथ समाज को यह संदेश भी दिया कि अब बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सरकार पूरी सख्ती के साथ खड़ी है।
मामला औरैया जिले के ऐरवाकटरा क्षेत्र के एक गांव का है। यहां संरक्षण अधिकारी रीना चौहान को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से सूचना मिली कि दो नाबालिग बहनों की शादी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एक बहन की उम्र अभिलेखों में 18 वर्ष दर्ज मिली लेकिन जिस लड़के से उसका विवाह तय किया गया था उसकी उम्र केवल 17 वर्ष 4 माह निकली। वहीं दूसरी बहन की उम्र मात्र 14 वर्ष 11 दिन पाई गई। इस आधार पर दोनों विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अवैध पाए गए। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों शादियां रुकवा दीं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों को कानून की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होना अनिवार्य है। अधिकारियों ने परिवार को यह भी समझाया कि बाल विवाह से बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है।
महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत लगातार महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना पर प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयां तत्काल कार्रवाई कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य बाल विवाह रोकने के साथ बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य को सुनिश्चित करना है।






