Barabanki City

नहर में फंसकर दम तोड़ बैठी गंगा डॉल्फिन व उसका बच्चा…उथले गर्म पानी, तपिश ने ली जान

वन विभाग व टीएसए की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शाम तक इंतजार की रणनीति भारी पड़ गई, ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाया, बोले समय रहते पानी छोड़ा जाता तो बच सकती थी जान

बाराबंकी, 22 मई 2026:

बाराबंकी के बड्डूपुर इलाके से गुजरी शारदा सहायक नहर में गंगा डॉल्फिन और उसका एक बच्चा घंटों फंसा रहा। हालात इतने बिगड़े कि दोनों की तड़पकर मौत हो गई। नहर में पानी बेहद कम था, ऊपर से भीषण गर्मी ने कसर पूरी कर दी। वन विभाग और टर्टल सर्वाइवल एलायंस की टीम घंटों रेस्क्यू की तैयारी करती रही, मगर दोनों डॉल्फिनों को बचाया नहीं जा सका।

सुबह छह बजे पड़ी ग्रामीणों की नजर

मादा डॉल्फिन की उम्र करीब पांच साल है। यह पांच फीट लंबी व 50 किलो वजन की थी। जबकि शावक की उम्र करीब एक साल आंकी गई है। रीवा सीवा गांव के पास गुरूवार की सुबह करीब साढ़े छह बजे ग्रामीणों ने नहर में भटककर आईं दो डॉल्फिनों को तड़पते देखा। सूचना मिलते ही वन दारोगा ओपी यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों को खबर दी गई, जिसके बाद लखनऊ से टीएसए की टीम भी पहुंची।

मौत से पूर्व संघर्ष में बीता समय, कम पानी मे रेत से रगड़ रहा था शरीर

वन विभाग के मुताबिक नहर में पानी बंद होने से जलस्तर घटकर करीब दो फीट रह गया था। नीचे रेत होने की वजह से डॉल्फिन आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। कई जगह उनके शरीर रेत से रगड़ खा रहे थे। टीम ने पहले नहर में अतिरिक्त पानी छोड़ने की कोशिश पर मंथन किया, फिर शाम के वक्त रेस्क्यू करने की योजना बनाई गई ताकि तापमान कुछ कम हो सके।

पहले मादा डॉल्फिन फिर बच्चे ने दम तोड़ा

दोपहर में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। ठहरा हुआ पानी तेजी से गर्म होता गया। इसी बीच करीब तीन बजे मादा डॉल्फिन ने दम तोड़ दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद उसके बच्चे की भी मौत हो गई। टीएसए के डॉ. शैलेंद्र सिंह ने दोनों को मृत घोषित किया।

वक्त रहते बचाव कार्य से बच जाती जान

घटना के बाद गांव वालों में नाराजगी दिखी। लोगों का कहना है कि टीम कई घंटे तक मौके पर रही, लेकिन नहर में तुरंत पानी छोड़ने या डॉल्फिन को बाहर निकालने के लिए तेजी से काम नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर वक्त रहते कार्रवाई होती तो दोनों की जान बच सकती थी।

राष्ट्रीय जलीय जीव है गंगा डॉल्फिन

बता दें कि गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। वन रेंजर मयंक सिंह ने बताया कि पिछले साल भी इसी नहर में पहुंची डॉल्फिनों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें घाघरा नदी में छोड़ा गया था। इस बार हालात ज्यादा मुश्किल थे क्योंकि पानी बेहद कम था और गर्मी लगातार बढ़ रही थी। डॉल्फिन के जीवित रहने के लिए 5 से 6 फिट पानी जरूरी होता है। वन विभाग ने दोनों डॉल्फिनों का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सकों के पैनल से कराया है।

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