लखनऊ, 24 मई 2026:
उत्तर प्रदेश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार अब राज्य को देश के सबसे बड़े रक्षा उत्पादन केंद्र के तौर पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में लखनऊ में यूपी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कॉन्क्लेव-2026 आयोजित करने की तैयारी चल रही है।
प्रस्तावित कॉन्क्लेव का फोकस उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने, नई रक्षा इकाइयों की स्थापना, एयरोस्पेस सेक्टर को विस्तार देने और युवाओं के लिए तकनीकी रोजगार तैयार करने पर रहेगा। कार्यक्रम के जरिए उद्योग जगत, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, रिसर्च संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की योजना है।
कॉन्क्लेव में यूपी डिफेंस कॉरिडोर की ताकत को प्रमुखता से पेश किया जाएगा। राज्य की रणनीतिक लोकेशन, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक जमीन की उपलब्धता, सिंगल विंडो सिस्टम और बेहतर कानून व्यवस्था को निवेश के बड़े आधार के तौर पर रखा जाएगा।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उद्घाटन सत्र प्रस्तावित है। इसके अलावा कई अहम पैनल चर्चा भी होंगी। इनमें उत्तर प्रदेश में डिफेंस निवेश की संभावनाएं, एयरोस्पेस और रक्षा इकाई रोजगार प्रोत्साहन नीति-2024, रक्षा क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने की पहल और डिफेंस कॉरिडोर में डीपीएसयू की भूमिका जैसे मुद्दों पर मंथन होगा।
कॉन्क्लेव में रक्षा उत्पादन सचिव रक्षा क्षेत्र के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार का विजन साझा कर सकते हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने की रणनीति पेश करेंगे। उद्योग और सरकार के बीच सीधे संवाद के लिए बी2बी और बी2जी इंटरैक्शन सत्र भी प्रस्तावित हैं।
कार्यक्रम के दौरान जिन प्रमुख बिंदुओं को सामने रखा जाएगा उनमें बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल कार्यबल, परीक्षण सुविधाएं, रिसर्च सहयोग, फिस्कल इंसेंटिव, सिंगल विंडो सिस्टम और रक्षा निर्माण क्षमता शामिल हैं।
प्रस्तावित सूची के मुताबिक कार्यक्रम में एचएएल, बीईएल, बीईएमएल समेत रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। टाटा, अडानी, एयरबस, बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इसके अलावा डीआरडीओ, एनएएल, बीआईएस, एमकेयू लिमिटेड, पीटीसी इंडस्ट्रीज, आइडियाफोर्ज और स्काईरूट जैसी कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।
कॉन्क्लेव के जरिए संभावित निवेश समझौते, परीक्षण और सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती और तकनीक आधारित रोजगार बढ़ाने पर जोर रहेगा। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को पहले ही राज्य की ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जा चुका है।






