Uttar Pradesh

UP में बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, 3.44 लाख महिलाओं को मिला सम्मान और सुरक्षा

मानदेय वृद्धि, पोषण ट्रैकर, फेस रिकग्निशन और आयुष्मान कार्ड से गांव-गांव में महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल बनीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं

लखनऊ, 24 मई 2026:

यूपी में आंगनबाड़ी व्यवस्था अब सिर्फ बच्चों और माताओं के पोषण तक सीमित नहीं है। यह महिला सशक्तीकरण, तकनीकी बदलाव और सामाजिक जागरूकता की मजबूत पहचान बनकर उभरी है। योगी सरकार के कार्यकाल में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को नई दिशा देते हुए लाखों महिलाओं को आर्थिक मजबूती और सामाजिक सम्मान दिलाने का काम किया है।

प्रदेश में इस समय 1,83,049 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और 1,61,491 सहायिकाएं कार्यरत हैं। यानी करीब 3.44 लाख महिलाएं गांव-गांव में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सरकार ने इन्हें केवल मानदेय आधारित कर्मी नहीं अपितु सामाजिक परिवर्तन की अहम कड़ी के रूप में स्थापित किया है।

योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मानदेय और प्रोत्साहन राशि में भी बड़ा सुधार किया है। वर्तमान में कार्यकत्रियों को 8 हजार रुपये और सहायिकाओं को 4 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था लागू की गई है।

पूरक पोषण का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने पर कार्यकत्रियों को 500 रुपये और सहायिकाओं को 400 रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। वहीं पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों की पूरी फीडिंग करने पर कार्यकत्रियों को 1,000 रुपये और सहायिकाओं को 350 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिल रही है।

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि योगी सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर आधुनिक स्वरूप दिया है। पोषण ट्रैकर प्रणाली लागू होने से लाभार्थियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो रहा है। योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी बनी है।

उन्होंने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है। योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है। सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश में अब तक 3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

इससे लाखों महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार मिला है। योगी सरकार की यह पहल अब उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और तकनीकी सुशासन की नई मिसाल बनती दिखाई दे रही है।

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