न्यूज डेस्क, 27 मई 2026:
मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने, बदनीयती दिखाने और बातचीत की आड़ में सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक तरीके से दिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी नेतृत्व अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं कर रहा और संभावित नए युद्ध की तैयारी तेज कर दी गई है। ईरान तीन मोर्चों सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन और कूटनीतिक रणनीति पर एक साथ काम कर रहा है। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इस पूरे संकट के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट है। इसे ईरान अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि नए संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचे और उसके सहयोगियों के हित सीधे निशाने पर हो सकते हैं।
कुछ दिन पहले आईआरजीसी ने भी चेतावनी दी थी कि किसी नए अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा हिंसक होगा और उसका असर मिडिल ईस्ट से बाहर तक महसूस किया जाएगा। ईरान ने दावा किया है कि उसकी फोर्स ने अमेरिकी एमक्यू-9बी और आरक्यू-4 ड्रोन को निशाना बनाया, जबकि ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे एफ-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग की गई।
उधर 88 दिनों बाद ईरान में इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली शुरू हुई है। इसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट में से एक माना जा रहा है। लंबे प्रतिबंधों से कारोबार, बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं।
दूसरी तरफ अमेरिका ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स और बंदर अब्बास के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया है। इस बीच इजरायल ने भी उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति को लेकर सुरक्षा बैठकें तेज कर दी हैं। हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले बढ़ा दिए हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति हालात संभाल पाएगी या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की आग में झुलसने वाला है।






