लखनऊ, 31 मई 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसा बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने का फैसला किया है। मुंशी-मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को जून के पहले सप्ताह में लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। दोनों वर्गों के टॉप-3 मेधावियों को टैबलेट भी दिए जाएंगे, ताकि वे आगे की पढ़ाई में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
प्रदेश में मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। मकसद यह है कि अल्पसंख्यक समाज के छात्र-छात्राएं आधुनिक शिक्षा से जुड़ें और रोजगार व उच्च शिक्षा के नए अवसर हासिल कर सकें। इस वर्ष उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड परीक्षा में 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 55,788 ने सफलता हासिल की। मुंशी-मौलवी और आलिम दोनों वर्गों की मेरिट सूची में टॉप-10 में पांच छात्र और पांच छात्राएं शामिल हैं। सभी मेधावियों को सम्मान समारोह में बुलाया जाएगा।
मुंशी-मौलवी (सेकेंडरी) वर्ग में चंदौली के मोहम्मद वसीम ने पहला, मीरजापुर के मोहम्मद कासिम अली ने दूसरा और गोरखपुर की शाइमा परवीन ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं आलिम (सीनियर सेकेंडरी) वर्ग में वाराणसी की जुमी फरीन, शाइस्ता परवीन और अमरोहा की उम्मुल खैर ने शीर्ष तीन स्थान प्राप्त किए। इन सभी मेधावियों को टैबलेट देकर सम्मानित किया जाएगा।
अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, ऐसे में उन्हें आधुनिक शिक्षा और तकनीकी संसाधनों से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि जून के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाले समारोह में दोनों वर्गों के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। टॉप-3 मेधावियों को टैबलेट दिए जाएंगे, जिससे वे अपनी पढ़ाई को और बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकें।
बाग दें कि मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 9 फरवरी से 14 फरवरी के बीच दो पालियों में आयोजित हुई थीं। पहली पाली में मुंशी और मौलवी वर्ग की परीक्षाएं हुईं, जबकि दूसरी पाली में आलिम, अरबी और फारसी विषयों की परीक्षा कराई गई। प्रदेशभर में 277 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई थी।






