लखनऊ, 5 जून 2026:
यूपी की सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा खाका तैयार किया है। प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास और भावी कार्ययोजनाओं की सीएम ने समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ये तीनों बल प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इन्हें तकनीकी रूप से सशक्त तथा आधुनिक बनाना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक ताकत उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक होते हैं। इसलिए प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाना चाहिए जिससे जवान हर परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों। उन्होंने पीएसी के गणवेश को सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई।
बैठक में पीएसी के डिजिटलीकरण और तकनीकी उन्नयन की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस और डैशकैम लगाए जा रहे हैं। त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित की जा रही है।मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश पीएसी एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।
इस परियोजना के तहत प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे कानून-व्यवस्था, चुनावी तैनाती, महिला सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। वर्तमान में बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने इन परिसरों में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमाएं स्थापित करने का निर्देश दिया। साथ ही बलरामपुर, मिर्जापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों की स्थापना संबंधी कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।
आगामी मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। वर्तमान में विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती बढ़ाने, उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करने तथा खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार करने को भी कहा गया।
यूपीएसएसएफ की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और अधिक मजबूत बनाने तथा सभी निर्माण एवं आधुनिकीकरण परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।






