लखनऊ, 6 फरवरी 2026:
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और जातिगत वैमनस्य फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
हजरतगंज कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह की ओर से दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और विषयवस्तु एक विशेष जाति ब्राह्मण समाज को लक्षित कर अपमानित करने की मंशा से तैयार की गई है, जिससे समाज में आक्रोश और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई है।
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों…
— Mayawati (@Mayawati) February 6, 2026
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि धार्मिक व जातिगत भावनाओं को आहत करने तथा समाज में सौहार्द बिगाड़ने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि फिल्म के माध्यम से शांति व्यवस्था भंग करने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुख और चिंता का विषय है कि हाल के समय में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि फिल्मों में भी ‘पंडित’ शब्द को अपमानजनक रूप में प्रस्तुत कर पूरे देश मे अपमान व अनादर किया जा रहा है। इससे पूरे ब्राह्मण समाज में भारी रोष व्याप्त है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जातिसूचक और अपमानजनक शीर्षक वाली ऐसी फिल्मों पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने इसे सामाजिक सौहार्द के लिए घातक बताते हुए बीएसपी की ओर से कड़ी निंदा दर्ज कराई।







