बाराबंकी, 17 मई 2026:
लखनऊ व प्रयागराज के दो बिल्डर कंपनी के बीच करीब साढ़े तीन साल पुराने कारोबारी रिश्ते ने अब आपराधिक मुकदमे का रूप ले लिया है। बाराबंकी में लखनऊ की बिल्डर कंपनी के निदेशक पर 3 करोड़ 81 लाख रुपये की ठगी, जालसाजी और मारपीट के आरोप का केस दर्ज किया गया है। ठगी का शिकार हुए प्रयागराज के व्यापारी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। मामला निवेश, कंपनी में हिस्सेदारी और कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है।
ये मुकदमा प्रयागराज के कचेहरी रोड निवासी अमित कुमार राय, जो अरिहंत डेवलपर्स के निदेशक हैं, ने दर्ज कराया है। उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) बाराबंकी की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उनकी मुलाकात जुलाई 2018 में शरद देवरा से हुई थी। लखनऊ गोमती नगर के विवेक खंड निवासी शरद देवरा पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी कंपनी देवरा बिल्डविल प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर बनाने और कारोबार में 50 फीसदी हिस्सेदारी देने का भरोसा दिया।
शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में अमित कुमार राय ने जुलाई 2018 में 50 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा किए। इसके बाद अगस्त 2018 से मार्च 2019 के बीच उन्होंने, उनकी पत्नी रूचि सिंह और उनकी कंपनी अरिहंत डेवलपर्स के खातों से अलग-अलग किश्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर की। आरोप है कि यह रकम कंपनी के खाते के अलावा शरद देवरा और उनकी पत्नी श्रुति देवरा के निजी खातों में भी भेजी गई। कुल निवेश 3 करोड़ 81 लाख रुपये बताया गया है।
अमित कुमार राय का कहना है कि उन्हें लगातार यह भरोसा दिया जाता रहा कि जितनी रकम निवेश करेंगे, उतने ही अधिक शेयर उनके नाम होते जाएंगे। हालांकि कई वर्षों तक उन्हें न तो कोई लाभ मिला और न ही निवेश की रकम वापस की गई। फरवरी 2026 में उन्हें पता चला कि कथित तौर पर उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें कंपनी के निदेशक पद से हटा दिया गया। इसके बाद जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो विवाद बढ़ गया।
अमित कुमार राय ने अदालत को बताया कि 7 फरवरी 2026 को बाराबंकी के दारापुर स्थित कार्यालय में हिसाब-किताब के लिए बुलाया गया था। वहां पहुंचने पर शरद देवरा और 10 से 15 अज्ञात लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और दोबारा पैसे मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। घटना की सूचना डायल 112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थानीय पुलिस और पुलिस अधीक्षक को कई बार तहरीर देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।






