लखनऊ, 10 मई 2026:
समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा के साथ आए मनोज पांडे को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। इसे भाजपा की ब्राह्मण वोटरों के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
मनोज पांडे पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय राजनीति में हैं और रायबरेली, अमेठी समेत आसपास के जिलों में ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। समाजवादी पार्टी में रहते हुए वह अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में शामिल रहे। वर्ष 2012 में जब उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनी थी, तब अखिलेश यादव ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था।

गांधी परिवार के प्रभाव वाले इलाके में लगातार कायम रहा दबदबा
मनोज पांडे ने रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट पर लगातार अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। वर्ष 2012 में वह पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2017 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली जिले से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतने वाले वह अकेले विधायक थे। विधानसभा में उनकी सक्रियता को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने 2022 में उन्हें विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक बनाया था। पार्टी संगठन और सदन, दोनों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।
भाजपा को समर्थन से बदला राजनीतिक समीकरण, घर पहुंचे थे अमित शाह
राज्यसभा चुनाव के दौरान फरवरी 2024 में मनोज पांडे ने पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। 12 मई 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके घर रायबरेली पहुंचे थे। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें मुख्य सचेतक पद से हटा दिया। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सपा से इस्तीफा दे दिया और भाजपा के साथ खुलकर खड़े हो गए। तभी से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भाजपा उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। अब योगी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद इस पर मुहर लग गई है।
ब्राह्मण चेहरे के तौर पर भाजपा की रणनीति
राजनीतिक जानकार भी कहते हैं कि मनोज पांडे को कैबिनेट में जगह देकर भाजपा ने ब्राह्मण मतदाताओं को साफ संदेश दिया है। रायबरेली और अमेठी जैसे क्षेत्रों में उनका असर माना जाता है, जहां लंबे समय से गांधी परिवार का राजनीतिक प्रभाव रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि मनोज पांडे की सियासी पकड़ का फायदा पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मिल सकता है।






