Lucknow CityNationalUttar Pradesh

लखनऊ में ‘सॉइल टू सिल्क’ की जीवंत झलक : रेशम उद्योग को नई पहचान देगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

रेशम उत्पादन, शुद्धता की पहचान और विपणन को मिलेगा एकीकृत मंच, प्रशिक्षण और जागरूकता के साथ ही एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी करेगा कार्य, प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन

लखनऊ, 3 फरवरी 2026:

यूपी के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के रेशम उद्योग को सशक्त बनाने, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान स्थापित करने और आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से लखनऊ में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की गई है। यह केंद्र रेशम उद्योग के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता का केंद्र बनने के साथ प्रदेश की पारंपरिक कला और कारीगरी को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिलाएगा।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ‘सॉइल टू सिल्क’ की संपूर्ण प्रक्रिया का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जा रहा है। इसमें नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी और परिधान निर्माण तक की सभी विधाओं को एक ही स्थान पर देखा और समझा जा सकता है। केंद्र का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह जानकारी देना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से किस प्रकार अंतर किया जाए।

यह केंद्र एक्जीबिशन और मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों की सीधी बिक्री की व्यवस्था की गई है। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

इस महत्वाकांक्षी केंद्र का उद्घाटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यहां रेशम कीट से धागा बनने तक की पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। मंत्री ने बताया कि यह स्थल पहले अनुपयोगी था। इसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य और उपयोगी स्वरूप दिया गया है।

मंत्री राकेश सचान ने बताया कि सीएम योगी के निर्देश पर वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है। इसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें। भारत सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान की जा रही है।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केंद्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारी, वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button