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हादसे से नहीं टूटेगा किसान परिवार… दुर्घटना के बाद 5 लाख का सहारा, यूपी सरकार की ये योजना बनी ढाल

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 18,145 किसानों को 873.58 करोड रुपये की सहायता दी गई, सरकार अब योजना को पूरी तरह डिजिटल कर रही है

लखनऊ, 28 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना किसानों और उनके परिवारों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर सामने आई है। वर्ष 2019 से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही यह योजना दुर्घटना की स्थिति में किसान परिवार को आर्थिक संबल देती है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी आकस्मिक घटना के बाद किसान परिवार आर्थिक संकट में न फंसे और उन्हें तत्काल मदद मिल सके।

एक साल में हजारों परिवारों को मिली राहत

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत अब तक 18,145 किसानों या उनके परिजनों को सहायता दी जा चुकी है। राजस्व विभाग द्वारा कुल 873.58 करोड रुपये की धनराशि वितरित की गई है। योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर रूप से अपंग होने पर किसान परिवार को पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे परिवार की आजीविका सुरक्षित रह सके।

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योजना का दायरा हुआ और व्यापक

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सरकार ने वर्ष 2023-24 में योजना के दायरे को और बढाते हुए भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों को भी इसमें शामिल किया। इसी वर्ष योजना के अंतर्गत 23,821 किसानों को 944.72 करोड रुपये की सहायता दी गई थी। योजना की शुरुआत से अब तक कुल 1,08,098 किसानों या उनके परिवारों को आर्थिक मदद मिल चुकी है, जो सरकार की किसान हितैषी सोच को दर्शाता है।

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डिजिटल व्यवस्था से खत्म होगी भागदौड

योजना के बेहतर संचालन और पारदर्शिता को बढाने के लिए सरकार इसे पूरी तरह डिजिटल बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्व परिषद और एनआईसी मिलकर एक आधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो फरवरी 2026 तक तैयार होगा। इसके बाद किसान घर बैठे आवेदन कर सकेंगे और उन्हें तहसील या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पडेंगे।

सीधे खाते में पहुंचेगी मदद

डिजिटल पोर्टल के जरिए आवेदन से लेकर सहायता राशि के सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि किसी भी तरह की गडबडी या भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी। योजना की निगरानी के लिए एक विशेष डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे सरकार हर स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर नजर रख सके।

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