न्यूज डेस्क, 5 मई 2026:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अब भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री चेहरे का है। प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई पार्टी के लिए यह फैसला जितना अहम है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। इसी बीच प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि राज्य में भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा। खास बात यह है कि बंगाली तिथि के अनुसार यह दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का भी है। इससे इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है।
भाजपा ने इस चुनाव में 206 सीटों (एक पर बढ़त का रुझान) पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया, जबकि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी महज 80 सीटों तक सिमट गई। इतना ही नहीं खुद ममता को उनके गढ़ में कड़ी चुनौती मिली, जिसने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है।

इस जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे नाम है शुभेंदु अधिकारी का। उन्होंने इस चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया। भवानीपुर कभी ममता बनर्जी का मजबूत किला माना जाता था। इस सीट पर भी शुभेंदु ने शानदार जीत दर्ज की।
वर्ष 2021 के चुनाव में नंदीग्राम में ममता को हराने के बाद यह उनकी दूसरी बड़ी जीत मानी जा रही है। पार्टी के अंदर एक बड़ा वर्ग मानता है कि ममता को लगातार मात देने वाले नेता को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। हालांकि मुकाबला सिर्फ एक नाम तक सीमित नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य खुद भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का श्रेय उन्हें दिया जा रहा है। उनकी छवि एक पढ़े-लिखे और संतुलित नेता की है, जो शहरी और मध्यम वर्ग में खास पकड़ रखते हैं।
तीसरा नाम है उत्पल ब्रह्मचारो, जिन्हें उत्पल महाराज के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक और सामाजिक कार्यों के जरिए उन्होंने जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनाई है। कालियागंज सीट से उनकी भारी जीत ने उन्हें अचानक सीएम रेस में ला खड़ा किया है। कुछ नेता उन्हें ‘बंगाल का योगी मॉडल’ भी मान रहे हैं।

वहीं चौथा बड़ा नाम स्वपन दासगुप्ता का है। वे एक जाने-माने पत्रकार, लेखक और इतिहासकार हैं। शिक्षित वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ और बौद्धिक छवि उन्हें अलग पहचान देती है। इसके अलावा संजीव सान्याल का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है।
मालूम हो कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल का बेटा होगा। यानी स्थानीय चेहरा ही चुना जाएगा। ऐसे में किसी बाहरी या पैराशूट उम्मीदवार की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है। अब सबकी नजरें दिल्ली से आने वाले केंद्रीय नेताओं और विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं।

वैसे भाजपा अपनी रणनीतिक चुप्पी के लिए जानी जाती है। इसलिए आखिरी वक्त पर कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने आ सकता है। लेकिन इतना तय है कि 9 मई को सिर्फ शपथ ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक दिशा भी तय होगी।






