न्यूज डेस्क, 19 जुलाई 2026:
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। सरकार की ओर से रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब विपक्षी सांसदों ने टीएमसी के बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने पर आपत्ति जताते हुए वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद विपक्ष के कई सांसद वापस बैठक में लौट आए।
संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके समेत कई दलों के नेता शामिल हुए थे। विपक्षी सांसदों का आरोप था कि सरकार ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों के गुट को बैठक में आमंत्रित किया जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इस गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि पूरे विपक्ष ने बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने सवाल उठाया कि 20 बागी सांसदों के विलय को स्पीकर की मंजूरी नहीं मिली है। उनके खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर बैठक में बुलाया? महुआ मोइत्रा ने 91वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि अलग समूह बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस ने विपक्षी दलों के समर्थन में बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान की अवहेलना के खिलाफ विपक्ष एकजुट है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद सभी की है और हंगामे से किसी का फायदा नहीं होगा। गौरतलब है कि 18वीं लोकसभा का नौवां सत्र यानी मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।






