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रंग ला रहे तेज फैसले और आसान नियम…यूपी बना कारोबार के लिए भरोसेमंद राज्य

पहले निवेशक हिचकते थे, अब योगी सरकार में डिजिटल सिस्टम और सिंगल विंडो से निवेशकों को मिली बड़ी राहत

लखनऊ, 23 जनवरी 2026:

पहले उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करना आसान नहीं था। फाइलें अटकती थीं, नियम उलझे रहते थे और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। यही वजह थी कि कई निवेशक चाहकर भी आगे नहीं बढ़ पाते थे। अब तस्वीर बदल चुकी है। अब योगी सरकार ने कारोबार से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को आसान करने पर सीधा काम किया। फोकस साफ था, कम कागजी झंझट, तेज फैसले और पारदर्शी व्यवस्था। इसी का नतीजा है कि आज उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में गिना जा रहा है, जहां कारोबार करना अपेक्षाकृत आसान हो गया है।

रैंकिंग में दिखा बदलाव

बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान की रैंकिंग में वर्ष 2017-18 में उत्तर प्रदेश 12वें नंबर पर था। लगातार सुधारों के बाद 2019 में राज्य दूसरे स्थान पर पहुंच गया। वर्ष 2021 के गुड गवर्नेस इंडेक्स में वाणिज्य और उद्योग श्रेणी में प्रदेश को पहला स्थान मिला। इसके बाद 2022 और 2024 में उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर का दर्जा दिया गया।

नियम आसान हुए तो कीमती समय भी बचा
सरकार ने उद्यम शुरू करने, जमीन से जुड़े मामलों, श्रम पंजीकरण, पर्यावरण स्वीकृति और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाओं को सरल किया। बीआरएपी और बीआरएपी-प्लस के तहत 24 क्षेत्रों में सैकड़ों सुधार लागू किए गए, ताकि निवेशकों का वक्त और संसाधन दोनों बच सकें।

निवेश मित्र से मिली राहत

इन सुधारों का बड़ा आधार बना निवेश मित्र पोर्टल। एक ही प्लेटफॉर्म से कई विभागों की सेवाएं ऑनलाइन मिल रही हैं। लाइसेंस और अनुमति से जुड़े ज्यादातर आवेदन तय समय में निपटाए जा रहे हैं। लाखों मामलों में डिजिटल स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं, जिससे निवेशकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे।

भौतिक आवेदन बंद, पारदर्शिता बढ़ी

सरकार ने लाइसेंस और मंजूरी के लिए ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था खत्म कर दी। सभी आवेदन ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इससे न केवल काम तेज हुआ, बल्कि लेन-देन में पारदर्शिता भी बढ़ी। निवेशकों का कहना है कि अब सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद नजर आता है।

निवेश मित्र 3.0 की तैयारी

सरकार अब निवेश मित्र के नए संस्करण पर काम कर रही है। इसमें रियल टाइम जानकारी, शिकायत निस्तारण और डिजिटल अलर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। अलग-अलग सरकारी प्लेटफॉर्म को जोड़कर एक ही सिस्टम से काम कराने की तैयारी है।

कम कानून होने से मिली ज्यादा सहूलियत

कारोबार से जुड़े हजारों नियमों और अनुपालनों को खत्म या सरल किया गया है। कई पुराने कानून हटाए गए हैं। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए पंजीकरण की बाध्यता कम की गई है। कई मामलों में अपराध की धाराएं हटाकर जुर्माने तक सीमित किया गया है।

डर नहीं, भरोसे का माहौल

सरकार का जोर इस बात पर है कि कारोबारी डर के नहीं, भरोसे के माहौल में काम करें। यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश सिर्फ बड़े बाजार के कारण नहीं, बल्कि आसान नियमों, डिजिटल व्यवस्था और स्थिर नीतियों के कारण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

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