लखनऊ, 25 अप्रैल 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) ने भी अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. रामदास आठवले ने 26 नवंबर को लखनऊ में विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
लखनऊ में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. आठवले ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केंद्र में एनडीए की सहयोगी होने के नाते उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने गठबंधन के तहत 25 सीटों की दावेदारी पेश की लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आरपीआई (ए) अकेले चुनाव मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी।
आठवले ने कहा कि पार्टी प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी है जिससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राजनीतिक दलों ने इन वर्गों के वोट तो लिए लेकिन उनके विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। आठवले ने कहा कि इन दलों का रुख महिला विरोधी रहा है। उन्होंने जानबूझकर इस बिल को फेल करने का काम किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर मुलायम सिंह यादव होते तो स्थिति अलग होती।
इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि दलित बहुल गांवों में समाज भवनों का निर्माण कराया जाए और उनका संचालन उसी समाज के लोगों को सौंपा जाए जिससे उन्हें सीधा लाभ मिल सके।
आठवले ने बहुजन समाज पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसका प्रभाव अब कम हो चुका है। लोकसभा में उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आरपीआई (ए) अब प्रदेश में वंचितों के विकास की नई राजनीति को आगे बढ़ाएगी।






