बलिया में बनेगा ‘भृगु कॉरिडोर’ का रास्ता! 8.74 करोड़ से संवरेगा महर्षि भृगु आश्रम, लाइट एंड साउंड शो से जीवंत होगी पौराणिक गाथा
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर भृगु आश्रम को भव्य स्वरूप देने की तैयारी, बनेगा दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल और भव्य स्वागत द्वार, 2025 में 10.31 लाख से अधिक पर्यटकों ने किया बलिया का रुख

लखनऊ/बलिया, 12 अक्टूबर 2026:
यूपी के बलिया जनपद की पौराणिक पहचान को अब पर्यटन के नए आयाम से जोड़ने की तैयारी है। हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे महर्षि भृगु आश्रम को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत इस परियोजना पर 8.74 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आश्रम में भव्य प्रवेश द्वार, दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल, यात्री शेड और लाइट एंड साउंड शो जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। यह पहल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ बलिया की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
भृगु कॉरिडोर की परिकल्पना को मिलेगी रफ्तार
सीएम योगी की प्राथमिकताओं में शामिल महर्षि भृगु आश्रम का कायाकल्प अब धरातल पर आकार लेने लगा है। मुख्यमंत्री बलिया में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महर्षि भृगु कॉरिडोर विकसित करने की बात कह चुके हैं। ऐसे में आश्रम के पर्यटन विकास की शुरुआत को इस व्यापक संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार प्रदेश सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि महर्षि भृगु आश्रम धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
स्वागत द्वार से लाइट एंड साउंड शो तक बदलेगा आश्रम का स्वरूप
महर्षि भृगु आश्रम के विकास में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और परिसर के आकर्षक स्वरूप पर विशेष ध्यान दिया गया है। योजना के तहत भव्य स्वागत द्वार और दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा यात्री शेड, आकर्षक वॉल आर्ट एवं म्यूरल आर्ट और आधुनिक साइनेज विकसित किए जाएंगे।
परियोजना का खास आकर्षण लाइट एंड साउंड शो होगा। इसके माध्यम से महर्षि भृगु की पौराणिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की योजना है। इससे आश्रम आने वाले लोगों को इसके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को बेहतर ढंग से जानने का अवसर मिलेगा।
कौन थे महर्षि भृगु, जिनकी तपोभूमि है बलिया?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि भृगु भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में प्रमुख स्थान रखने वाले ऋषि थे। मान्यता है कि उन्होंने बलिया स्थित इसी तपोभूमि पर तपस्या की थी और यहां भृगु संहिता की रचना की। भृगु संहिता ज्योतिष परंपरा से जुड़ा प्रसिद्ध ग्रंथ है। महर्षि भृगु के वंशज भार्गव कहलाते हैं। उनकी स्मृति और परंपरा से जुड़ी विरासत आज भी धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बलिया की पहचान को मिलेगा पर्यटन का नया आयाम
बिहार सीमा से सटे बलिया का महत्व केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। यह जिला स्वतंत्रता संग्राम में अपनी क्रांतिकारी भूमिका के लिए भी जाना जाता है। रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के यहां प्रवास से जुड़ी मान्यताएं भी इसकी पौराणिक पहचान को समृद्ध करती हैं। वर्ष 2025 में बलिया में 10.31 लाख से अधिक पर्यटकों का पहुंचना जिले की पर्यटन संभावनाओं को दर्शाता है।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के मुताबिक सरकार 12 पर्यटन सर्किट के तहत धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को विकसित करने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में महर्षि भृगु आश्रम को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की पहल की जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद आश्रम श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनने के साथ बलिया की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का नया केंद्र भी बन सकता है। इससे जिले में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।






