Uttar Pradesh

‘बलिया का सत्तू’ सात समंदर पार.. अब लड्डू तैयार, इन विदेशी बाजारों में बजेगा डंका

योगी सरकार की ओडीओपी योजना ने बदली तस्वीर, ई-कॉमर्स से बढ़ी मांग; अब सत्तू के लड्डू की भी होगी इंटरनेशनल एंट्री, सैकड़ों महिलाओं को मिला रोजगार

लखनऊ, 11 मई 2026:

यूपी सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना अब प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में बलिया का मशहूर चने का सत्तू अब देश की सीमाओं को पार कर अमेरिका, चीन, नेपाल, दुबई समेत कई खाड़ी देशों तक अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब बलिया के सत्तू से तैयार होने वाले लड्डू को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

योगी सरकार की पहल से बलिया का यह पारंपरिक और पौष्टिक उत्पाद आज डिजिटल बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियो मार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के लोग अब यूपी के इस देसी उत्पाद को पसंद कर रहे हैं। कभी गांवों तक सीमित रहने वाला सत्तू अब हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले शहरी लोगों की पहली पसंद बन चुका है।

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निधि उद्योग की संस्थापक नीति अग्रवाल ने बताया कि बलिया के सत्तू से बनने वाले लड्डू को अमेरिका और खाड़ी देशों में भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बलिया का यह पारंपरिक स्वाद वैश्विक बाजार में नई पहचान बनाएगा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा और ओडीओपी योजना से सत्तू कारोबार को नई उड़ान मिली है।

इस बढ़ते कारोबार ने रोजगार के नए दरवाजे भी खोले हैं। व्यवस्थापक सौरभ अग्रवाल के अनुसार सत्तू उत्पादन और पैकेजिंग से करीब 700 से अधिक महिलाएं जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं, द्वाबा क्षेत्र के किसानों का चना हाथोंहाथ खरीदा जा रहा है। इससे उन्हें उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिल रहा है।

सत्तू को जल्द जीआई टैग मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, ब्रांडिंग मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी साख और बढ़ेगी। किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ एक्सपोर्ट के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।

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डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि ओडीओपी योजना का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। वहीं, सीडीओ ओजस्वी राज ने बताया कि भृगु मंदिर के आसपास सत्तू को बाबा का प्रसाद माना जाता है। इसी सांस्कृतिक पहचान को ब्रांड में बदलने की रणनीति बनाई गई।

उन्होंने बताया कि आकर्षक पैकेजिंग के जरिए होली-दिवाली जैसे अवसरों पर सत्तू भेंट कर इसकी पहचान बढ़ाई गई। इंडस्ट्रियल एरिया में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने के बाद एफपीओ के जरिए किसानों और लोगों को जोड़ा गया। वर्तमान में करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चने की खेती हो रही है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों को बलिया के सत्तू के पैकेट भेजकर इस देसी उत्पाद को बढ़ावा देने की पहल की है।

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