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अब ‘वीबी-जी राम जी’ गांवों को देगा रोजगार की नई गारंटी… एक जुलाई से बंद होगी मनरेगा योजना

केंद्र सरकार ने किया ऐलान, मजदूरों के काम पर नहीं पड़ेगा कोई असर, अब हर परिवार को मिलेगा 125 दिन रोजगार, मनरेगा में था सिर्फ सौ दिन का प्राविधान

न्यूज डेस्क, 11 मई 2026:

केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि एक जुलाई 2026 से देशभर में नया विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी लागू किया जाएगा। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर दिया जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक नया कानून सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव से मजदूरों के रोजगार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया बिना रुकावट के लागू की जाएगी।

मंत्रालय ने कहा है कि 30 जून तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य नए सिस्टम में उसी तरह जारी रहेंगे। किसी भी परियोजना को बीच में नहीं रोका जाएगा। सरकार के अनुसार जिन मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड ई-केवाईसी के जरिए सत्यापित हैं उनके कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।

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जॉब कार्ड नहीं होने पर भी रजिस्ट्रेशन रहेगा जारी

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन मजदूरों का ई-केवाईसी अभी पूरा नहीं हुआ है उन्हें भी काम से वंचित नहीं किया जाएगा। वहीं जिन लोगों के पास जॉब कार्ड नहीं है उनका पंजीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर पहले की तरह जारी रहेगा। मजदूरी भुगतान, शिकायत निवारण, फंड आवंटन और ट्रांजिशन से जुड़े नियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चर्चा के बाद जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

मनरेगा से 25 दिन अधिक मिलेगा रोजगार

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों को इस नई व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ बताया है। सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी कानून गांवों में रोजगार बढ़ाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में मदद करेगा।सरकार ने कहा कि नए कानून के तहत अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन रोजगार देने की गारंटी होगी जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और मजबूत होगी। कानून की धारा 22 के तहत योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उठाएंगी।

सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा 60:40 के अनुपात में होगा जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। वहीं धारा 6 के अनुसार राज्य सरकारें बुवाई और कटाई जैसे कृषि के व्यस्त मौसम में साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत दिए जाने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगी।

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