Barabanki City

कर्ज व सूदखोरों के जाल ने लीला एक और व्यापारी, बेटे को स्कूल छोड़ने के बाद उठाया खौफनाक कदम

करीब छह महीने पहले शहर में अनूप गुप्ता ने खोली थी नई मिठाई की दुकान, ट्रेन के आगे खड़े होकर दे दी जान, उड़ गए शरीर के चीथड़े, बढ़ते खर्च और कर्ज की वसूली से चल रहे थे परेशान, परिवार ने कारोबार की चिंता बताई, पुलिस हर पहलू की जांच में जुटी, इससे पहले कपड़ा कारोबारी नीरज जैन ने सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर खुद को गोली मार ली थी

बाराबंकी, 6 जुलाई 2026:

बाराबंकी शहर के मशहूर मिठाई कारोबारी अनूप गुप्ता ने सोमवार सुबह ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि वह करीब दो करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे थे। करीबी लोगों का कहना है कि ब्याज पर लिया गया पैसा लौटाने का लगातार दबाव था, जिससे वह लंबे समय से मानसिक तनाव में चल रहे थे। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना शहर से सटी बनवा रेलवे क्रॉसिंग के पास हुई। पुलिस के मुताबिक अनूप सुबह बेटे को जयपुरिया स्कूल छोड़ने के लिए घर से निकले थे। इसके लिए उन्होंने पड़ोसी की बाइक ली थी। स्कूल से लौटने के बजाय वह रेलवे क्रॉसिंग पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फरक्का एक्सप्रेस के आते ही उन्होंने ट्रेन के सामने छलांग लगा दी। तेज रफ्तार ट्रेन उन्हें काफी दूर तक घसीटती चली गई, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से बाइक बरामद की, जिसकी जांच में वह पड़ोसी हिमांशु रस्तोगी के नाम पर दर्ज मिली। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के बाद शव की पहचान अनूप गुप्ता के रूप में हुई। अनूप गुप्ता शहर के नाका सतरिख चौराहे के पास कृष्णा स्वीट्स नाम से मिठाई की दुकान चलाते थे। इससे पहले वह किराना कारोबार से जुड़े थे। परिवार में पत्नी, एक बेटी और एक बेटा हैं। उनकी बेटी भव्या इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश की टॉपर्स सूची में जगह बना चुकी हैं और इस समय लखनऊ में बीटेक की पढ़ाई कर रही हैं।

मृतक के भाई राजीव गुप्ता ने बताया कि अनूप पिछले कुछ समय से कारोबार को लेकर परेशान थे। हालांकि परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। करीबी व्यापारी मित्र राजीव टंडन का दावा है कि अनूप ने पहले कारोबार के दौरान करीब दो करोड़ रुपये ब्याज पर उधार लिए थे। इन्हीं पैसों से कुछ महीने पहले नई मिठाई की दुकान शुरू की थी। दुकान का काम ठीक चल रहा था, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे थे। दूसरी तरफ कर्ज देने वाले लोग मूल रकम के साथ ब्याज की वसूली का दबाव बना रहे थे। इसी वजह से वह लगातार तनाव में रहते थे।

बता दें इससे पहले 12 अक्टूबर 2025 को लक्ष्मणपुरी कालोनी में रहने वाले नीरज जैन ने खुद को गोली मार ली थी। उन्होंने कई पेज के सुसाइड नोट में घाटा, कर्ज और सूदखोरों का जिक्र किया था। एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हुई थी जिसमें धमकी भरे अंदाज में कर्ज चुकाने की बात कही। फिलहाल इस मामले में एफआईआर भी हुई। कुछ हाईकोर्ट से जमानत ले आए, अन्य की गिरफ्तारी नहीं हुई मामला शांत हो गया।
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इसके तीन माह बाद 20 जनवरी को फिर एक गोली चली और और आजाद नगर में रहने वाले नवीन उर्फ संजय जायसवाल ने खुदकुशी कर ली। बताया गया कि वो अपनी पैर की बीमारी से परेशान थे। नवीन टेंट और गल्ला के बड़े कारोबारी थे। तीन महीने के अंदर दो व्यापारियों की मौत से सभी दुखी थे।
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अब इस ताजी घटना ने एक बार फिर से शहर में मकड़जाल की तरह फैले सूदखोरी के कारोबार पर सवाल दागे हैं। पुलिस या अन्य संबंधित विभाग ब्याज पर रकम बांटने वालों के नेटवर्क को आज तक तोड़ नहीं पाई। गली गली घरों में दुकान खोले बैठे इन सूदखोरों को पूरा शहर जानता है सिवा जिम्मेदारों के।

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