लखनऊ/बरेली, 27 जनवरी 2026:
प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ ही उन्हें शामली के डीएम कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है।
सोमवार 26 जनवरी को सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर अलंकार अग्निहोत्री ने प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी थी। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर दिए गए इस इस्तीफे ने सरकार और नौकरशाही दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा। अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर गहरा आक्रोश जताया था।
सात पन्नों के इस्तीफे में उन्होंने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि अब देश में न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र बल्कि भ्रमतंत्र रह गया है। उन्होंने मौजूदा सरकार को देशी नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार बताते हुए यूजीसी के नए कानून का भी विरोध किया।
अलंकार अग्निहोत्री ने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए अपनी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में साधु-संतों, बटुकों और ब्राह्मणों के साथ किया गया व्यवहार न सिर्फ निंदनीय है बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटी और शिखा जैसे धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। यह घटना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को झकझोर देने वाली है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर भी वायरल हुई। उसमें वह यूजीसी बिल के विरोध में पोस्टर लिए नजर आए। सोमवार को वह डीएम आवास पहुंचे, जहां करीब एक घंटे तक रुकने के बाद बाहर आकर उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अलंकार अग्निहोत्री का दावा है कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाकर रखा गया था। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल सरकार के निलंबन आदेश और जांच के ऐलान के बाद यह मामला और भी राजनीतिक व प्रशासनिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।






