
न्यूज डेस्क, 13 सितंबर 2026:
भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक ने भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। करीब 50 मिनट चली बातचीत में सीमा पर शांति, सीमा विवाद के समाधान, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। दोनों नेताओं ने रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हित के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना दोनों देशों के दीर्घकालिक हित में है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के निरंतर विकास की बुनियादी शर्त है।
सीमा पर शांति को बताया रिश्तों की कुंजी
प्रधानमंत्री ने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और बनी हुई समझ का पूरी तरह पालन करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। यह संदेश खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत-चीन संबंधों में सीमा का मुद्दा लंबे समय से सबसे संवेदनशील विषय रहा है।

जिनपिंग ने भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश और वैश्विक दक्षिण के महत्वपूर्ण सदस्य होने के नाते भारत और चीन की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने दोनों देशों से मानवता के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखकर काम करने की बात कही।
व्यापार में भारत ने उठाया असंतुलन का मुद्दा
बैठक में आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों पर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों और बाजार तक सार्थक एवं पूर्वानुमेय पहुंच जैसी चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता स्वीकार की। भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है क्योंकि चीन के साथ व्यापार में लंबे समय से असंतुलन चिंता का विषय रहा है।
दोनों नेताओं ने कारोबार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों की आवाजाही को बढ़ाने पर भी जोर दिया। इससे दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क और व्यावसायिक रिश्तों को फिर गति देने की कोशिश के संकेत मिलते हैं।

साझा हितों पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और चीन ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार को लगातार विस्तार देने पर भी सहमति जताई। BRICS जैसे मंच पर दोनों देशों की भूमिका को देखते हुए यह सहमति वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत ने चीन के आगामी BRICS अध्यक्ष पद के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
मोदी-जिनपिंग वार्ता को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत संबंध सुधार के लिए तैयार है लेकिन सीमा पर शांति, आपसी सम्मान और आर्थिक हितों में संतुलन इसकी अनिवार्य शर्तें हैं। सीमा विवाद का समाधान और व्यापार में बराबरी की दिशा में ठोस प्रगति ही इस नई पहल की असली कसौटी होगी।






