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नाजुक उम्र, थकते कदम जब जिम भी न जा पाएं… जानिए तब बुजुर्गों के लिए कैसे सुपर-ईजी है योग

स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए जरूरी है योग, घुटनों के दर्द, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर एवं मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए योग बन रहा बेहतर जीवनशैली का आधार

न्यूज डेस्क, 19 जून 2026:

21 जून को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रही है। इस बार योग दिवस का संदेश केवल फिटनेस तक सीमित नहीं है बल्कि इसका फोकस स्वस्थ वृद्धावस्था पर भी है। आयुष मंत्रालय द्वारा घोषित की गई इस बार की मुख्य थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ है। यानी ऐसा बुढ़ापा जिसमें व्यक्ति उम्र बढ़ने के साथ-साथ सक्रियता, ऊर्जा और मानसिक मजबूती बनी रहे।

क्रोनिक बीमारियों पर योग का प्रहार

बुढ़ापे की दहलीज पर कदम रखते ही शरीर में कई अनचाहे मेहमान जैसे घुटनों का दर्द, शुगर, बढ़ा हुआ बीपी और मानसिक तनाव दस्तक देने लगते हैं। ऐसे में योग वृद्धों के लिए सिर्फ एक व्यायाम नहीं बल्कि बेहतर जीवन की उम्मीद बनकर सामने आया है। आइए जानते हैं कि ढलती उम्र में योग कैसे एक संजीवनी बूटी की तरह काम करता है।

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घुटने और जोड़ों का दर्द

उम्र बढ़ने पर जोड़ों के बीच का नेचुरल लुब्रिकेंट (साइनोवियल फ्लूइड) कम होने लगता है जिससे हड्डियां आपस में टकराती हैं और तेज दर्द होता है। इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि जब बुजुर्ग हल्के योगिक स्ट्रेचिंग अभ्यास करते हैं तो जोड़ों के आस-पास रक्त संचार बढ़ता है और नेचुरल ग्रीस का निर्माण फिर से शुरू हो सकता है। जिससे सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में आसानी होती है।

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डायबिटीज पर लगाम

उम्र के साथ शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है जिससे इंसुलिन सही मात्रा में नहीं बन पाता। ऐसे में योग के जरिए पेट पर हल्का दबाव डालने वाले और रीढ़ को मोड़ने वाले आसन सीधे हमारे पेनक्रियाज को एक्टिवेट करते हैं। इससे इंसुलिन का स्राव संतुलित होता है और ब्लड शुगर का स्तर बिना अत्यधिक दवाओं के कंट्रोल में रहने लगता है।

ब्लड प्रेशर और दिल पर दबाव

मानसिक चिंताएं और धमनियों का कड़ापन बुजुर्गों में हाई ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण बनते हैं। योग विशेषज्ञ का कहना है कि प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी और लंबी सांसें लेते हैं तो हमारे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। यह कोर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन) को कम करता है जिससे बीपी नॉर्मल एवं दिल पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन से जंग

रिटायरमेंट के बाद खालीपन, समाज से दूरी, डिप्रेशन और भूलने की बीमारी बुजुर्गों को घेर लेती है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, ध्यान (मेडिटेशन) और योग करने से मस्तिष्क के ग्रे-मैटर में सुधार होता है और दिमाग में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। यह याददाश्त को तेज तो करता ही है साथ ही मन को असीम शांति देकर गहरी और सुकून भरी नींद लाता है।

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बुजुर्गों के लिए ‘सुपर-इजी’ योगासन

योग विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कठिन और जटिल आसनों की जरूरत नहीं होती। बुजुर्गों को जिम की तरह भारी वजन उठाने या अत्यधिक शारीरिक मेहनत करने की आवश्यकता नहीं है। उनका लक्ष्य शरीर को लचीला, संतुलित और सक्रिय बनाए रखना होना चाहिए।

ताड़ासन (संतुलन और रीढ़ की मजबूती के लिए)

सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचें और पंजों पर हल्का सा संतुलन बनाएं। ढलती उम्र में अक्सर बुजुर्गों का संतुलन बिगड़ने से गिरने का डर रहता है (जो चोटों का बड़ा कारण बनता है)। ताड़ासन शरीर का संतुलन और पोस्चर (मुद्रा) एकदम सटीक रखता है। बुजुर्गों के लिए यह एक सरल और सुरक्षित योगासन माना जाता है जिसे आसानी से दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

कटिचक्रासन (जकड़न को करता है कम)

पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाकर सीधे खड़े हो जाएं और अपनी कमर को दोनों तरफ धीरे-धीरे घुमाएं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मदद करता है और पीठ के निचले हिस्से की जकड़न को कम कर सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने या कम शारीरिक गतिविधि के कारण होने वाली अकड़न में भी यह लाभकारी माना जाता है। नियमित अभ्यास से कमर और कंधों की मांसपेशियों में रक्त संचार बेहतर होता है।

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शवासन (तनाव से मिलती है राहत)

पीठ के बल सीधा लेट जाएं, दोनों हाथों और पैरों को आराम की स्थिति में रखें एवं आंखें बंद कर लें। इसके बाद पूरे शरीर को ढीला छोड़ते हुए केवल अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। यह आसन शरीर और मन को गहरा आराम देने के लिए जाना जाता है। नियमित रूप से शवासन करने से तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम करने में मदद मिल सकती है।

भुजंगासन (शरीर को बनाता है लचीला)

पेट के बल लेट जाएं और दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें। धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं और गर्दन को आरामदायक स्थिति में रखें। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करता है। साथ ही पीठ, कंधों और छाती की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। हालांकि बुजुर्गों को इसे अपनी क्षमता के अनुसार और विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना चाहिए।

चेयर योग (उनके लिए जो जमीन पर नहीं बैठ सकते)

अगर घुटनों में दर्द है या जमीन पर बैठना-उठना मुश्किल लगता है तो योग छोड़ने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुर्सी पर बैठकर भी कई प्रभावी योग अभ्यास किए जा सकते हैं। कुर्सी पर सीधे बैठकर पैरों को सामने की ओर फैलाना, पंजों को आगे-पीछे घुमाना और टखनों की हल्की मूवमेंट करना पैरों में रक्त संचार बेहतर बनाने में मदद करता है।

प्राण वायु बढ़ाने वाले प्राणायाम

योग विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र में शरीर को जितनी जरूरत दवाओं और पौष्टिक भोजन की होती है उतनी ही आवश्यकता सही तरीके से सांस लेने की भी होती है। प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने, शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर करने और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि इसे बुजुर्गों के लिए योग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अनुलोम-विलोम

दाईं नाक को बंद कर बाईं से सांस लेना और फिर बाईं को बंद कर दाईं से छोड़ना। यह पूरे शरीर के नर्वस सिस्टम को री-बूट कर देता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 10 से 15 मिनट प्राणायाम करने से बुजुर्ग खुद को अधिक ऊर्जावान, शांत और मानसिक रूप से संतुलित महसूस कर सकते हैं।

भ्रामरी प्राणायाम

कानों को अंगूठे से बंद कर, आंखें मूंदकर नाक से गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे भौंरे जैसी गुंजन की ध्वनि निकाली जाती है। यह सरल लेकिन बेहद प्रभावी प्राणायाम माना जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इसका नियमित अभ्यास मन को शांत करने, तनाव और चिंता को कम करने एवं मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है। बढ़ती उम्र में जब अनिद्रा, बेचैनी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं तब भ्रामरी प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

ध्यान रखने वाली जरूरी चीजें

योग करते समय बुजुर्गों को ‘सेफ्टी फर्स्ट’ का नियम याद रखना चाहिए। जिस मुद्रा में सुख मिले, वही आसन बढ़िया है। कभी भी शरीर को बहुत ज्यादा न खींचें या मोड़ें। कोई भी आसन करते या छोड़ते समय अचानक या झटके से मूवमेंट न करें। अगर कोई गंभीर ऑपरेशन हुआ हो या रीढ़ में स्लिप डिस्क जैसी समस्या हो तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित योग थेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लें।

इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ हमें यही सिखाती है कि योग के जरिए हम अपनी उम्र के सालों में जीवन की गुणवत्ता को जोड़ सकते हैं। उम्र का बढ़ना प्रकृति का नियम है लेकिन बूढ़ा और लाचार होना हमारी पसंद हो सकता है।

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