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बालवाटिका : नया एजुकेशन प्लान, खेल-खेल में होगी पढ़ाई, हर बच्चे तक पहुंचेगी लर्निंग किट

एजुकेटर गाइड, वर्कबुक, बिग बुक्स और प्रोग्रेस कार्ड के जरिए बच्चों को मिलेगा गतिविधि आधारित सीखने का माहौल, क्यूआर कोड और किताब वितरण ऐप से होगी हर स्तर पर निगरानी, NCERT और नई शिक्षा नीति के मुताबिक तैयार की गई सामग्री से पांच विकास क्षेत्रों को मिलेगा बल

लखनऊ, 19 जून 2026:

उत्तर प्रदेश में शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार अब बालवाटिकाओं को पूरी तरह शैक्षणिक संसाधनों से लैस करने में जुट गई है। आधारभूत सुविधाओं और ईसीसीई शिक्षकों की तैनाती के बाद सरकार का फोकस अब इस बात पर है कि हर बालवाटिका में बच्चों के लिए ऐसी सामग्री पहुंचे, जिससे पढ़ाई बोझ नहीं बल्कि खेल और गतिविधियों के जरिए एक आनंददायक अनुभव बन सके।

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इसी कड़ी में प्रदेश की सभी बालवाटिकाओं के लिए एजुकेटर गाइड, बच्चों की वर्कबुक, बिग बुक्स और समग्र प्रोग्रेस कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि शुरुआती शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को स्कूल के माहौल के लिए तैयार करने का अहम पड़ाव है।

बालवाटिकाओं में उपलब्ध कराई जा रही सामग्री को इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे कहानियों, चित्रों, रंगों, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए सहज तरीके से सीख सकें। इसका मकसद बच्चों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को बढ़ावा देना है।

सरकार की तरफ से तैयार किए गए इस शैक्षणिक पैकेज में एजुकेटर गाइड, बाल वर्कबुक, बिग बुक्स और समग्र प्रोग्रेस कार्ड शामिल हैं। इससे शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण में मदद मिलेगी, वहीं बच्चों को भाषा, सोचने-समझने की क्षमता और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियों के जरिए सीखने का मौका मिलेगा।

सामग्री की सप्लाई और उपलब्धता पर नजर रखने के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और किताब वितरण ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए जिला, ब्लॉक और बालवाटिका स्तर तक रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। पूरी सामग्री एनसीईआरटी के मानकों, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एफएस) और नई शिक्षा नीति-2020 के मुताबिक तैयार की गई है। सामग्री बनाते समय बच्चों की उम्र, भाषा, चित्रों की गुणवत्ता, फॉन्ट आकार और गतिविधियों की उपयोगिता का खास ध्यान रखा गया है, ताकि उन्हें विकास के अनुरूप सीखने का माहौल मिल सके।

यह सामग्री बच्चों के शारीरिक, संज्ञानात्मक, भाषाई, सामाजिक-भावनात्मक और रचनात्मक विकास को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कहानी सुनाने, रंग भरने, चित्र पहचानने, संवाद और अन्य गतिविधियों के जरिए बच्चों की कल्पनाशक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षित ईसीसीई शिक्षकों, तकनीक आधारित निगरानी और बाल-अनुकूल लर्निंग मैटेरियल के जरिए सरकार स्कूल रेडीनेस को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इससे निपुण भारत मिशन, आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान से जुड़े लक्ष्यों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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