लखनऊ, 18 मई 2026:
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेशवासियों के नाम भावनात्मक और वैचारिक संदेश जारी किया है। ‘योगी की पाती’ शीर्षक से लिखी गई इस चिट्ठी में उन्होंने भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, प्राचीन पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर बड़ा आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने सवाल के साथ अपनी बात शुरू करते हुए पूछा कल भारत की आत्मा क्या है? और फिर स्वयं ही उसका उत्तर देते हुए वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानकदेव और संत कबीर जैसी महान परंपराओं को भारत की पहचान बताया।
सीएम योगी ने कहा कि भारत की यह अक्षुण्ण सांस्कृतिक पहचान श्रवण परंपरा और पांडुलिपियों के माध्यम से हजारों वर्षों तक सुरक्षित रही। तकनीक के विकास के साथ यही ज्ञान ग्रंथों के रूप में घर-घर पहुंचा और भारतीय सभ्यता की चेतना को जीवित रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी जी पांडुलिपियों को भारत की आत्मा का अध्याय मानते हैं।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी पाण्डुलिपियों को भारत की आत्मा का अध्याय मानते हैं। पीढ़ियों से संचित ज्ञान का लाभ आज हम इसलिए ले पा रहे हैं, क्योंकि ये पाण्डुलिपियां हजारों वर्षों से ज्ञान चेतना जाग्रत करती रहीं।
मैं आग्रह करता हूं कि… pic.twitter.com/3r4YWnz7ly
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 18, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ग्रंथ धार्मिक दस्तावेज के साथ विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, संगीत, वास्तुकला और दर्शन का विशाल ज्ञान भंडार हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भूमि बन चुका है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर और काशी का दिव्य स्वरूप इसका प्रमाण हैं।
सीएम योगी ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि देशभर की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए नेशनल डिजिटल रिपोजिटरी बनाई जाएगी। इससे दुनिया भर के विद्यार्थी और शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगे।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र मौजूद हैं तो उसकी जानकारी ‘ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप’ या पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही इन्हें उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को दान करने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मिशन केवल विरासत बचाने का नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को मजबूत करने का अभियान है जो 2047 तक विकसित भारत के विजन को नई ऊर्जा देगा।






