राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 16 अप्रैल 2026:
उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा को विश्वस्तरीय स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में पर्यटन विकास बोर्ड और कौशल विकास विभाग ने गुरुवार को स्किलिंग विषय पर एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने किया। इसमें यात्रा से जुड़े फ्रंटलाइन कार्यबल और स्थानीय समुदायों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में दो प्रमुख पैनलों के माध्यम से चर्चा हुई। पहले पैनल में गाइड, पोर्टर, ड्राइवर और आतिथ्य कर्मियों जैसे फ्रंटलाइन कर्मचारियों की स्किलिंग पर फोकस रहा। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यात्रा शुरू होने से पहले न्यूनतम दक्षता मानक तय किए जाएं और स्थानीय भाषाओं में अल्पकालिक मॉड्यूलर प्रशिक्षण दिया जाए। प्रमाणन और आईडी सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया गया। प्राथमिक उपचार, हिमालयी परिस्थितियों की समझ, मौसम की जानकारी और भीड़ प्रबंधन को प्रशिक्षण का अनिवार्य हिस्सा बनाने की सिफारिश की गई। पैनल का मानना रहा कि मानकीकरण और प्रमाणन से यात्री सुरक्षा मजबूत होगी और कार्यबल को औपचारिक पहचान मिलेगी।
दूसरे पैनल में होमस्टे संचालकों, विक्रेताओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की स्किलिंग पर चर्चा हुई। यात्रा-तैयार होमस्टे मानकों के निर्धारण, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग व जीआई टैगिंग जैसे मुद्दों पर सहमति बनी। इसके साथ ही ऋण सुविधा, डिजिटल भुगतान और बाजार से जोड़ने की रणनीति पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने से आर्थिक लाभ क्षेत्र में ही टिकेगा और आत्मनिर्भर पर्यटन अर्थव्यवस्था विकसित होगी।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा आस्था के साथ-साथ हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। स्किलिंग से युवाओं को रोजगार और सम्मान मिलेगा। उन्होंने स्किलिंग संवाद श्रृंखला के तहत 12 और कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की।
पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल ने पर्यटन अनुभव सुधारने और पलायन रोकने पर बल दिया। कौशल विकास सचिव सी रविशंकर ने प्रशिक्षण को एकीकृत कर आईटीआई को सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की बात कही। बैठक में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, सीएसआर और टूरिज्म सेस के जरिए ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल पर भी सहमति बनी। कार्यक्रम में अपर सचिव अभिषेक रुहेला, नरेंद्र सिंह भंडारी समेत कई विशेषज्ञों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।
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