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नैमिषारण्य से मिश्रिख तक आस्था का महाकाय विस्तार, महर्षि दधीचि तीर्थ के विकास को मिली रफ्तार

99.14 लाख की परियोजना मंजूर, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से सीतापुर को मिलेगा नया धार्मिक-पर्यटन पहचान

लखनऊ/सीतापुर, 16 अप्रैल 2026:

यूपी का सीतापुर जनपद एक बार फिर धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र में आ गया है। सीएम योगी की अगुवाई में सरकार नैमिषारण्य और उससे जुड़े पौराणिक स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में जुटी है। इसी क्रम में मिश्रिख स्थित महर्षि दधीचि तीर्थ के विकास को हरी झंडी दे दी गई है।

राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 99.14 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इसमें से 74 लाख रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है। यह परियोजना नैमिषारण्य क्षेत्र को एक प्रमुख आध्यात्मिक-पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसमें ‘वेदारण्यम’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं पहले से प्रगति पर हैं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार मिश्रिख का महर्षि दधीचि तीर्थ प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत यात्री सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है।

करीब 25 लाख रुपये की लागत से यात्री शेड का निर्माण किया जाएगा। स्वागत द्वार के लिए लगभग 9.25 लाख और चेंज रूम के लिए 7.28 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा साइट डेवलपमेंट, कोटा स्टोन फ्लोरिंग, विद्युत व्यवस्था, प्लंबिंग, जलापूर्ति, सीवरेज और लैंडस्केपिंग जैसे कार्यों के जरिए पूरे परिसर का कायाकल्प किया जाएगा। आंतरिक और बाहरी प्रकाश व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जाएगा।

मिश्रिख का महर्षि दधीचि कुंड आस्था और त्याग का अद्वितीय प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियां दान कर दी थीं। उनसे बना वज्र दानव वृत्रासुर के अंत का कारण बना। यह स्थल आज भी उस महान बलिदान की गाथा को जीवंत रखता है।

सीतापुर का नैमिषारण्य क्षेत्र भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी और ललिता देवी मंदिर जैसे प्रमुख स्थल स्थित हैं। वर्ष 2025 में यहां 18 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। सरकार को उम्मीद है कि इन विकास कार्यों से धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

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