लखनऊ, 8 जून 2026:
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेशवासियों को ‘योगी की पाती’ के माध्यम से भावनात्मक संदेश दिया है। इस बार उनका पत्र प्रकृति, पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण को समर्पित है। सीएम ने बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि कभी वर्षा ऋतु में सुनाई देने वाले कीट-पतंगों के स्वर, गर्मियों की रातों में चमकते जुगनू, भोर में गौरैयों की चहचहाहट और पेड़ों पर मैनाओं का कलरव हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हुआ करते थे लेकिन आज शहरों में ये दृश्य और ध्वनियां लगभग दुर्लभ हो चुकी हैं।
सीएम योगी ने इसे केवल जैव विविधता का संकट नहीं बल्कि जीवन के लिए खतरे का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता आवश्यक है लेकिन प्रकृति से विमुख होकर नहीं। जीव-जंतु प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फसल उत्पादन से लेकर खाद्य श्रृंखला तक, हर जीव प्रकृति के विशाल चक्र का अनिवार्य हिस्सा है।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति के हर जीव को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। उन्होंने प्रभु श्रीराम की सेना का उदाहरण देते हुए कहा कि वानरों, ऋक्ष, जटायु और नन्ही गिलहरी तक ने अधर्म के विरुद्ध संघर्ष में योगदान दिया था। यह मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने नौ वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन्हीं सतत प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में बाघ, तेंदुए और राज्य पक्षी सारस की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही प्रदेश के 13 आर्द्रस्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर सूची में शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन पक्षियों और जीवों को प्रदेश से लगभग विलुप्त माना जा रहा था। वे अब दोबारा दिखाई देने लगे हैं। तराई क्षेत्र में अत्यंत दुर्लभ जर्डन्स बैबलर पक्षी वर्षों बाद देखा गया जबकि दुधवा टाइगर रिजर्व में 117 वर्षों बाद पेंटेड कीलबैक नामक दुर्लभ सर्प की उपस्थिति दर्ज की गई।
सीएम योगी ने युवाओं और बच्चों से विशेष अपील करते हुए कहा कि प्रकृति के बीच जाने पर केवल पर्यटक बनकर न रहें बल्कि जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह उसे समझने का प्रयास करें। उन्होंने प्रकृति से जुड़े अनुभवों को ब्लॉग, लेख और स्कूली परियोजनाओं के माध्यम से साझा करने का भी आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और अपनापन ही जैव विविधता के सबसे बड़े संरक्षक हैं।






