लखनऊ, 11 अप्रैल 2026:
राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित गांधी भवन में शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर प्रदेश स्तरीय अधिवक्ता सम्मेलन आयोजित हुआ। इस दौरान अधिवक्ता हितों पर चर्चा करने के साथ ईरान व अमेरिका युद्ध में भारत की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठे वहीं मिर्जापुर में वकील की हत्या का मुद्दा भी गूंजा।
कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सांसद प्रमोद तिवारी समेत तमाम वकील और कांग्रेस से जुड़े लोग शामिल हुए। सम्मेलन में नेताओं ने न्याय व्यवस्था, संविधान और अधिवक्ताओं की भूमिका पर बात रखी। फुले के सामाजिक न्याय के विचारों को याद करते हुए उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। कहा गया कि कमजोर और वंचित तबकों को न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी अहम है।
सलमान खुर्शीद ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी की। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उन्होंने कहा कि जिस देश को शांति से कोई लेना देना नहीं, वह आज खुद को शांतिदूत बता रहा है। उनका कहना रहा कि अगर भारत ने अपनी भूमिका सही तरीके से निभाई होती तो हालात अलग होते।
उन्होंने विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कूटनीतिक स्तर पर जो पहल होनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी, इसी वजह से दूसरे देश मौके का फायदा उठा रहे हैं। SIR प्रक्रिया को लेकर कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उनके पास अभी समय है। उन्हें आगे आकर अपने नाम जुड़वाने चाहिए, यह जरूरी प्रक्रिया है और इसमें सबकी भागीदारी होनी चाहिए।
अधिवक्ताओं के मुद्दे पर बोलते हुए खुर्शीद ने कहा कि संविधान को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। वकील इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं और इस तरह के कार्यक्रम से उन्हें मजबूती मिलती है।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मिर्जापुर में एक अधिवक्ता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में हालात ठीक नहीं हैं। उनका कहना रहा कि लगातार वकीलों पर हमले हो रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पहले की घटनाओं में सख्त कदम उठाए गए होते तो इस तरह की वारदात दोबारा नहीं होती।






