लखनऊ, 17 फरवरी 2026:
मनरेगा को खत्म किए जाने और सरकार के कथित कुशासन के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तथा सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को यूपी की राजधानी लखनऊ में विधानभवन के घेराव की कोशिश की। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद सैकड़ों कार्यकर्ता माल एवेन्यू स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से निकले लेकिन कुछ ही दूर पर पहले से की गई पुख्ता बैरिकेडिंग ने उनके कदम रोक दिए। पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और पीएसी के सैकड़ों जवान मौके पर पहले से मुस्तैद थे।
बैरिकेड पर पहुंचते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा सहित कई नेता-कार्यकर्ता बैरियर पर चढ़ गए। आगे बढ़ने की कोशिश पर पुलिस और आरएएफ ने किसी तरह भीड़ को रोका। इस दौरान पुलिस से नेताओं और कार्यकर्ताओं की धक्कामुक्की भी हुई। अजय राय को पुलिस द्वारा घसीटे जाने का आरोप भी लगा। इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के मनीष हिंदवी के मुताबिक पार्टी विधानभवन का घेराव कर अपनी आवाज बुलंद करना चाहती थी लेकिन प्रशासन ने पहले से ही सख्ती बरतते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान अजय राय सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया गया।
प्रदर्शन में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय, सांसद किशोरी लाल शर्मा, विधायक वीरेंद्र चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। वहीं, बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया को लखनऊ निकलने से पहले ही उनके घर में नजरबंद कर दिया गया। रायबरेली और अमेठी सहित अन्य जिलों से आने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी रास्ते में रोके जाने की खबरें सामने आईं।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार मनरेगा को कमजोर कर उद्योगपतियों को बढ़ावा दे रही है। उत्तर प्रदेश में कुशासन चरम पर है। मनीष हिंदवी के अनुसार निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए कई पदाधिकारियों को सोमवार रात और मंगलवार सुबह हाउस अरेस्ट किया गया। महिला कांग्रेस की महासचिव सुमन प्रजापति को नोटिस थमाकर घर से बाहर न निकलने को कहा गया। मालूम हो कि यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के चलते विधानभवन और आसपास हजरतगंज, राजभवन, एनेक्सी तिराहा, बापू भवन, बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही।






