
देहरादून, 17 जुलाई 2026:
हरेला सिर्फ एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता से जुड़ा जनआंदोलन है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के दौरान यह बात कही। उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हरियाली बढ़ाने के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी देता है।
पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार हरेला के मौके पर पूरे उत्तराखंड में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। उनका कहना था कि हर लगाया गया पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है और इसी सोच के तहत Ecology और Economy दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है।
एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाएं और उसके पेड़ बनने तक उसकी देखभाल का जिम्मा भी उठाए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में इस अभियान के तहत दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब एक करोड़ 15 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं।

उत्तराखंड की पहचान है साझा संस्कृति
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला ऐसा लोकपर्व है जो समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने खुशी जताई कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह के साथ इस पर्व में शामिल हो रहा है। उनके मुताबिक यही उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता की असली पहचान है।
लोक संस्कृति को नई पहचान देने की कोशिश
उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व के जरिए उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नया मंच मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके गीतों ने उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक मुद्दों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का काम किया है।

कलाकारों और शिल्पकारों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व राज्य के लोक कलाकारों, बुनकरों, शिल्पकारों, हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों और पारंपरिक व्यंजन तैयार करने वाले लोगों के लिए बड़ा मंच बन रहा है। स्थानीय उत्पाद खरीदना सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का भी जरिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि ऐसे आयोजन कलाकारों और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए मौके तैयार करेंगे।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, लोक कलाकार, शिल्पकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और अन्य लोग मौजूद रहे।






