लखनऊ, 12 जनवरी 2026:
केजीएमयू परिसर में तीन दिन पूर्व 9 जनवरी को हुए उपद्रव और महिलाओं के साथ अभद्रता के मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए शिक्षक, रेजिडेंट्स, नर्सिंग और कर्मचारियों की संयुक्त समिति ने आज एक बैठक की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि 24 घंटे के भीतर केजीएमयू प्रशासन द्वारा दी गई तहरीर पर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती, तो 13 जनवरी से आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर OPD बंद कर दी जाएगी।
बता दें कि केजीएमयू में यौन शोषण व धर्मांतरण के आरोपी डॉ. रमीज पर कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए कुलपति ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। इसके बाद राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव केजीएमयू आईं। उनके समर्थकों और कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने परिसर में जमकर हंगामा किया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कुलपति कार्यालय को करीब तीन घंटे तक अपने कब्जे में रखा। इससे प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं और कुलपति का सीयूजी मोबाइल फोन गुम हो गया।
गत 9 जनवरी को हुए इस घटनाक्रम में गंभीर आरोप लगाते हुए केजीएमयू प्रशासन ने उसी दिन प्रॉक्टर द्वारा चौक थाने में तहरीर दी थी, लेकिन तीन दिन बीतने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षक, रेजिडेंट्स, नर्सिंग और कर्मचारियों की संयुक्त समिति की बैठक सोमवार को केजीएमयू में हुई। बैठक में वक्ताओं ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताया और कहा कि इससे सरकार की छवि भी धूमिल हुई। अगर कुलपति और अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं तो बाकी कर्मचारियों की सुरक्षा की स्थिति सोचने की भी जरूरत नहीं है।
बैठक में यह तय किया गया कि यदि 13 जनवरी मंगलवार तक प्रशासन द्वारा दी गई तहरीर पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो OPD को बंद कर दिया जाएगा। बैठक में आगे की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। 13 जनवरी को अपरान्ह 2 बजे शिक्षक, रेजिडेंट्स, नर्सिंग और कर्मचारियों के संगठनों की संयुक्त समिति की बैठक पुनः आयोजित की जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।






