लखनऊ, 24 मई 2026:
यूपी में गो संरक्षण अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण को रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़कर एक नया विकास मॉडल तैयार किया है।
प्रदेश में इस समय 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं। इनमें 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी बड़ा लाभ मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़े हुए हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज हुई है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रही हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी नई गति मिली है।
योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार का बड़ा संसाधन माना गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है। इसके साथ प्राकृतिक खेती से 8 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। इससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।






