लखनऊ, 24 मई 2026:
यूपी में बेसिक शिक्षा व्यवस्था तेजी से नए दौर में प्रवेश कर रही है। कभी बदहाल भवनों, टूटी दीवारों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के लिए चर्चा में रहने वाले परिषदीय विद्यालय अब आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। सीएम योगी के नेतृत्व में चलाए जा रहे ऑपरेशन कायाकल्प ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी हैं।
प्रदेश सरकार के मुताबिक अब तक 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों को अभियान के दायरे में लाया जा चुका है। वर्ष 2017-18 में विद्यालयों का संतृप्तिकरण केवल 36 प्रतिशत था। अब यह बढ़कर 96.30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गांवों के सरकारी स्कूलों में अब साफ-सुथरे परिसर, बेहतर शौचालय, पेयजल, बिजली और बच्चों के बैठने की आधुनिक व्यवस्था दिखाई दे रही है।
बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण देने के लिए 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सरकार का लक्ष्य अब स्कूलों में नामांकन बढ़ानने के साथ सरकारी शिक्षा को निजी स्कूलों के मुकाबले खड़ा करना है। इसी रणनीति के तहत सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित करने का फैसला भी इसी बदलाव का हिस्सा है। प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित होने वाले 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों में से 141 के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी बनाए जा रहे हैं। इनमें प्री-प्राइमरी से कक्षा-8 तक के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी। योगी सरकार ने बालिका शिक्षा को भी प्राथमिकता दी है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इससे दूरदराज और वंचित क्षेत्रों की बेटियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सकेगा।
प्रदेश में सरकारी स्कूलों के तेजी से हुए इस कायाकल्प को अब देश में एक बड़े शिक्षा मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट स्कूल और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के जरिए यूपी अब बेसिक शिक्षा में नई राष्ट्रीय पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।






