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रामनगरी से काशी तक रंगभरी एकादशी की धूम… साधु-संत संग श्रद्धालुओं ने उड़ाया अबीर-गुलाल

अयोध्या में साधु-संतों ने राम और हनुमान संग खेली होली, काशी में महादेव गौरा संग छह घंटे करेंगे नगर भ्रमण

अयोध्या/वाराणसी, 27 फरवरी 2026:

रंगभरी एकादशी के अवसर पर शुक्रवार को अयोध्या और काशी दोनों ही धार्मिक नगरी रंग, भक्ति और लोक परंपराओं से सराबोर नजर आईं। रामनगरी में जहां साधु-संतों ने भगवान राम और हनुमान जी के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर होली उत्सव की शुरुआत की, वहीं काशी में शिव-गौरा के गौना उत्सव को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं।

अयोध्या में साधु-संतों ने मनाया रंगोत्सव

रंगभरी एकादशी पर अयोध्या के मंदिरों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा। साधु-संत अपने आराध्य भगवान राम और उनके परम भक्त हनुमान जी के साथ होली के रंग में रंगे दिखाई दिए। मंदिरों में अबीर-गुलाल उड़ाकर होली खेली गई और राग-रंग के कार्यक्रमों के साथ उत्सव का शुभारंभ हुआ। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में सुबह विधिवत पूजन और श्रृंगार के बाद हनुमान जी को अबीर-गुलाल अर्पित किया गया। महंत संजय दास के सानिध्य में निशान और छड़ी की पूजा-आरती हुई। इसके बाद नागा साधुओं ने हनुमंतलला को गुलाल चढ़ाते हुए शोभायात्रा निकाली।

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शोभायात्रा सरयू तट पहुंची, जहां संतों ने स्नान और पूजन किया। इसके बाद मठ-मंदिरों में जाकर विग्रहों को गुलाल लगाते हुए होली का निमंत्रण दिया गया। पंचकोसी परिक्रमा के साथ यात्रा का समापन हुआ और रामनगरी में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी गई।

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काशी में शिव-गौरा के गौना उत्सव की तैयारियां पूरी

उधर काशी में रंगभरी एकादशी शिव और माता गौरा के दांपत्य मिलन के रूप में मनाई जा रही है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार बाबा विश्वनाथ गौना के बाद पहली बार नगर भ्रमण करते हैं। इस बार भी बाबा और माता गौरा की चल प्रतिमाएं लगभग छह घंटे नगर भ्रमण कर विश्वनाथ मंदिर पहुंचेंगी। गौना उत्सव की शुरुआत 24 फरवरी से हल्दी की रस्म के साथ हो चुकी है। गुरुवार को महादेव अघोर स्वरूप में रुद्राक्ष और करुंगली की माला धारण कर गणों के साथ गौरा सदनिका पहुंचे, जिसे प्रतीकात्मक रूप से ससुराल माना जाता है। भक्तों ने भावविभोर होकर उनका स्वागत किया।

कुशा से बने मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महादेव को विराजमान कराया गया और पंचमेवा व विजया मिश्रित ठंडई का भोग लगाया गया। पांच वैदिक ब्राह्मणों द्वारा चार दिवसीय अनुष्ठान जारी है।

शाम पांच बजे निकलेगी पालकी यात्रा

आयोजन समिति के अनुसार रंगभरी एकादशी की शाम पांच बजे गौरा सदनिका से बाबा और माता गौरा की पालकी यात्रा निकाली जाएगी, जो नगर भ्रमण करते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। इस दौरान श्रद्धालु अबीर-गुलाल के साथ बाबा संग होली खेलेंगे और लोकगीतों से पूरी काशी गूंज उठेगी। रंगभरी एकादशी के साथ ही अयोध्या और काशी में होली उत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक रंग पूरी तरह चढ़ गया है।

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