Uttar Pradesh

आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं गीता देवी… विद्युत सखी बन ऐसे बदली किस्मत

एनआरएलएम और योगी सरकार की योजनाओं से मिली नई पहचान, अब हर महीने 45 हजार तक की आय, गांव की 3500 महिलाओं को दिया सशक्तिकरण का रास्ता

लखनऊ/बागपत, 6 अप्रैल 2026:

यूपी के गांव-गांव में जनकल्याणकारी योजनाएं सुखद बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक स्थित लुहारा गांव की गीता देवी हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से निकलकर आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल कायम की है।

कभी परिवार की सीमित आय पर निर्भर रहने वाली गीता देवी आज न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना चुकी हैं अपितु गांव की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी सफलता की यह कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ने के बाद शुरू हुई। वर्ष 2018 में कृष्णा स्वयं सहायता समूह से जुड़ते ही उनके जीवन की दिशा बदल गई। समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें नेतृत्व का अवसर मिला और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग खुला।

योगी सरकार द्वारा प्रदान किए गए रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि ने गीता देवी को आगे बढ़ने का आधार दिया। उन्होंने 25,000 रुपये का लोन लेकर विद्युत सख के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही ‘बीसी सखी’ के रूप में चयनित होकर उन्होंने अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए।

अपनी मेहनत और लगन के दम पर गीता देवी आज हर महीने 40,000 से 45,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। पहले उनकी आय मात्र 15,000 रुपये के आसपास थी। अब तक वह लगभग दो करोड़ रुपये के बिजली बिल का संग्रह कर चुकी हैं। दो लाख का कमीशन प्राप्त कर जिले की अग्रणी विद्युत सखियों में शामिल हो गई हैं।

उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली जब वर्ष 2023 में लखपति दीदी योजना के तहत दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया। गीता देवी की सफलता से प्रेरित होकर लुहारा गांव और आसपास के क्षेत्रों की करीब 3500 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं।

गीता देवी की यह प्रेरक यात्रा बताती है कि सरकार की योजनाओं का सही लाभ उठाकर कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। आज वह अपने परिवार का सहारा बनने के साथ ही समाज में महिला सशक्तिकरण की सशक्त पहचान भी बन चुकी हैं।

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