गोरखपुर के स्वर्णिम इतिहास की झलक : नेशनल सेमिनार व आर्काइवल एग्जिबिशन में दिखेगी आजादी की अनकही गाथा
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में 19 और 20 फरवरी को होगा आयोजन, देशभर से विद्वान, शोधार्थी और इतिहास प्रेमी लेंगे हिस्सा, गोरखपुर जेल के अभिलेख भी दर्शकों को उस दौर की सिहरन भरी तस्वीर दिखाएंगे
लखनऊ/गोरखपुर, 18 फरवरी 2026:
यूपी के गोरखपुर के दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में 19 और 20 फरवरी को दो दिवसीय नेशनल सेमिनार और आर्काइवल एग्जिबिशन का आयोजन किया जा रहा है। सेमिनार का विषय ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और इतिहासलेखन’ (उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में) रखा गया है। इसमें देशभर से विद्वान, शोधार्थी और इतिहास-प्रेमी हिस्सा लेंगे।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की पहल के अनुरूप संस्कृति विभाग और राज्य अभिलेखागार की ओर से गोरक्षा रिसर्च चेयर के तहत गोरखपुर का इतिहास विषय पर विशेष आर्काइवल एग्जिबिशन भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में क्षेत्र के गौरवशाली अतीत से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, अभिलेख और तस्वीरें पहली बार एक साथ आमजन के सामने आएंगी।

प्रदर्शनी के आकर्षणों में गुरु गोरखनाथ से संबंधित प्राचीन पांडुलिपियों की छायाप्रतियां, 1857 की क्रांति में गोरखपुर की भूमिका से जुड़े अभिलेख, अमर शहीद बंधु सिंह का चित्र सहित विस्तृत विवरण और गोरखपुर अंचल के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची शामिल है। चौरी-चौरा शहीद स्थल से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों के साथ काकोरी कांड के क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी से जुड़े रिकॉर्ड भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
इसके अलावा गोरखपुर जेल के अभिलेख भी दर्शकों को उस दौर की सिहरन भरी तस्वीर दिखाएंगे, जहां महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई थी। 1942 के आंदोलन के दौरान देवरिया कचहरी में तिरंगा फहराने वाले रामचंद्र विद्यार्थी और सोना सुनार से जुड़े दस्तावेज भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। गोरखपुर के ऐतिहासिक-पर्यटन स्थलों और वंदे मातरम के इतिहास से जुड़ी सामग्री इसे और खास बनाएगी।
मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार यह आयोजन छात्रों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को गोरखपुर की समृद्ध विरासत से जोड़ने का सेतु बनेगा। 1857 की क्रांति से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक गोरखपुर की धरती ने आज़ादी की जंग में जो बलिदान दिए, यह प्रदर्शनी उन गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।






